मनीष कुमारभरतपुर। श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजन का विशेष महत्व है। शहर से मात्र 5 किमी दूर स्थित गांव नौंह के लोग आज भी 1100 साल पुराने शिवलिंग की पूजा करते हैं। शिवलिंग को लेकर एक मान्यता जुड़ी हुई है। ग्रामीण मानते हैं कि यह महज शिवलिंग नहीं बल्कि गांव के रक्षक हैं।
गांव निवासी हरमूल शर्मा ने बताया कि उत्खनन के दौरान मिला बलुआ पत्थर से निर्मित शिवलिंग ताम्रयुगीन है। इतिहासकारों ने इसे 1100 वर्ष प्राचीन बताया है। वर्तमान में शिवलिंग गांव स्थित ऐतिहासिक स्मारक परिसर में स्थापित है। करीब 200 वर्षों से ग्रामीण हर दिन आकर शिवलिंग की पूजा करते हैं। बुजुर्ग हरमूल बताते हैं कि यह सामान्य नहीं बल्कि बहुत ही चमत्कारिक शिवलिंग है।
जो वर्षों से गांव की रक्षा करते आ रहे हैं। जब भी गांव में कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो शिवजी पूरे गांव की रक्षा करते हैं। बताया कि जब से शिवलिंग स्थापित हुआ है गांव में बाढ़, बारिश ओलावृष्टि, भूकंप सहित कोई प्राकृतिक आपदा नहीं आई है। मान्यता है गांव में प्राकृतिक आपदा आने पर लोग शिवलिंग की शंख बजाकर परिक्रमा लगाते हैं, इससे अनिष्ट रुक जाते हैं। संवाद
कई सभ्यताओं का राज दबा है
नौंह गांव में आर्य और महाभारत कालीन सभ्यता के अवशेष मिल चुके हैं। वर्ष 1963 में पुरातत्व विभाग की ओर से गांव में किए गए उत्खनन के दौरान मौर्यकालीन, शुंग, कुषाण, ताम्र, आर्य और महाभारत कालीन सभ्यता के अवशेष मिले थे।