राजस्थान के कोटा जिले के प्राइवेट स्कूल शिव ज्योति कांवेंट की कक्षा 2 की किताब में मां को अम्मी और पिता को अब्बू पढ़ाया जा रहा है। बच्चों से कहा जा रहा है कि वह रोज बिरयानी लाएं और खाएं। इस किताब का प्रकाशक हैदराबाद का है और यह वहीं से छपकर आई है। मामला सामने आने के बाद इसे लेकर अब बवाल शुरू हो गया है। बच्चों के परिजनों ने इसे लेकर नाराजगी जाहिर की है। वहीं, हिंदू संगठनों ने इसे शिक्षा का इस्लामीकरण बताया है।
माता-पिता का आरोप है कि किताब में कई जगह उर्दू शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे उनके बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है। हमारे बच्चे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन किताब देखकर लगता है कि उन्हें उर्दू स्कूल में भर्ती करवाया गया है। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे शाकाहारी परिवार से आतें हैं, लेकिन किताब में लिखा है कि बच्चों को बिरयानी खिलाई जाए। स्कूल में भी उनसे रोज बिरयानी लाने के लिए कहा जा रहा है।
स्कूल की जिस किताब में यह सब लिखा गया है, वह इंग्लिश ग्रामर की बुक है। उसके पहले चैप्टर में फादर को अब्बू, मदर को अम्मी लिखा गया है। आरोप है कि स्कूल में भी उन्हें यही सिखाया जा रहा है। दूसरे चैप्टर में ग्रैंड फादर का नाम फारुख और बच्चे का नाम आमिर लिखा गया है। चौथे चैप्टर के पेज नंबर 20 पर माता-पिता किचन में हैं और उनहें बिरयानी बनाते हुए दिखाया गया है।
बजरंग दल के सह-प्रांत समन्वयक योगेश रेनवाल ने बताया कि 12 जुलाई से कोटा के अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के फोन आ रहे हैं। उन्होंने स्कूल में पढ़ाई जाने वाली किताबों में इस्लाम धर्म से संबंधित शब्दों के होने की जानकारी दी थी। रेनवाल ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का इस्लामीकरण किया जा रहा है। बता दें कि अब तक स्कूल की ओर से इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा गया है।