भाजपा प्रत्याशी सुखवंत सिंह तथा कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी आर्यन जुबेर
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राजस्थान के अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट पर आगामी 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में भाजपा ने सुखवंत सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। सुखवंत सिंह पिछली बार निर्दलीय चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहे थे और भाजपा के उम्मीदवार को पछाड़ दिया था। अब भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर एक मजबूत चुनावी दांव खेला है। कांग्रेस की ओर से आर्यन जुबेर का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जो दिवंगत विधायक जुबेर खान के बेटे हैं।
पिछले चुनाव में निर्दलीय रहते हुए सुखवंत ने मारी थी बाजी
पिछले विधानसभा चुनाव में सुखवंत सिंह ने बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर धकेलते हुए उसकी जमानत जब्त करवा दी थी। उस चुनाव में भाजपा ने ज्ञानदेव आहूजा के भतीजे जय आहूजा को टिकट दिया था, लेकिन वे केवल 34 हजार वोट ही हासिल कर सके। सुखवंत सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने का सीधा फायदा कांग्रेस के जुबेर खान को हुआ, जिन्होंने चुनाव जीता था।
जुबेर खान के देहांत के बाद हो रहा उपचुनाव
रामगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव की जरूरत जुबेर खान की मृत्यु के बाद उत्पन्न हुई। कांग्रेस ने इस बार जुबेर खान के बेटे आर्यन जुबेर को उम्मीदवार बनाने की तैयारी की है। आर्यन जुबेर पहले से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्हें अपने पिता की मृत्यु से सहानुभूति का भी लाभ मिल सकता है। जुबेर खान की छवि एक ऐसी नेता की थी, जिन्होंने क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए काम किया था। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने मेवात विकास बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए गौशाला खोलने का प्रस्ताव भी पास करवाया था, जिससे हिंदू समुदाय में उनकी लोकप्रियता बढ़ी थी।
सुखवंत सिंह का भाजपा में स्वागत
भाजपा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद सुखवंत सिंह ने आज अलवर जिला भाजपा कार्यालय पहुंचकर जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता से मुलाकात की और उन्हें मिठाई खिलाई। भाजपा की उम्मीद है कि सुखवंत सिंह इस बार कांग्रेस को चुनौती देते हुए पार्टी को जीत दिला सकते हैं।
कड़ी टक्कर की उम्मीद
रामगढ़ सीट पर इस बार उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। सुखवंत सिंह की निर्दलीय स्थिति में पिछले चुनाव में मजबूत प्रदर्शन और आर्यन जुबेर को सहानुभूति के वोट मिलने की संभावना इस चुनाव को दिलचस्प बना रही है। अब देखना होगा कि किस पार्टी के उम्मीदवार को जनता का समर्थन मिलता है और कौन इस बार रामगढ़ की सीट पर कब्जा जमाएगा।