राजस्थान के नारायणपुर स्थित श्रीमती महादेवी शिक्षण प्रशिक्षण कॉलेज में उस समय हड़कंप मच गया, जब कॉलेज प्रशासन की ओर से 102 छात्राओं का एडमिशन रद्द कर दिया गया। इस निर्णय के विरोध में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे से बड़ी संख्या में छात्राएं कॉलेज के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें दूर-दराज के कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
‘साल बर्बाद होने का डर’
धरने पर बैठी छात्राओं ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने पहले उनका एडमिशन लिया और उनसे पूरी फीस भी जमा करवाई, लेकिन अब अचानक बहरोड़ और हरियाणा जैसे दूरस्थ इलाकों के कॉलेजों में भेजा जा रहा है। छात्राओं का कहना है कि वे इतनी दूर पढ़ाई के लिए नहीं जा सकतीं। माधोगढ़ की एक छात्रा ने भावुक होकर बताया कि उसके परिजनों ने कर्ज लेकर फीस भरी थी और अब 100 किलोमीटर दूर कॉलेज भेजे जाने से उसका पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने की स्थिति बन गई है।
प्रिंसिपल पर डराने का आरोप
छात्राओं ने कॉलेज के प्रिंसिपल पर डराने-धमकाने के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शन में शामिल अन्य छात्राओं को चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने धरने पर बैठी छात्राओं का समर्थन किया, तो उनका एडमिशन भी रद्द कर दिया जाएगा। इससे कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल बन गया।
पुलिस मौके पर, स्थिति संभालने की कोशिश
मामले की जानकारी मिलते ही नारायणपुर थाना पुलिस कॉलेज पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने छात्राओं और कॉलेज प्रशासन से बातचीत कर माहौल शांत रखने की अपील की। फिलहाल परिसर में शांति बनी हुई है, लेकिन छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी हुई हैं।
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कॉलेज प्रशासन की सफाई
कॉलेज के प्रिंसिपल होशियार सिंह ने मामले पर सफाई देते हुए बताया कि एडमिशन प्रक्रिया पीटीईटी के माध्यम से हुई थी। उनके अनुसार, गुरुवार शाम को पीटीईटी की ओर से ईमेल के जरिए 102 छात्राओं का दाखिला अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में कुल 120 सीटें हैं और यह बदलाव तकनीकी कारणों से हुआ है।
पीटीईटी ईमेल का हवाला
प्रिंसिपल ने यह भी बताया कि पीटीईटी के ईमेल में छात्राओं को ‘असहमत’ होने की स्थिति में तीन दिन के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प दिया गया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से समस्या का समाधान निकल सकता है और छात्राओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
छात्राओं की स्पष्ट मांग है कि उन्हें इसी कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने दी जाए। उनका कहना है कि जब तक उनका एडमिशन बहाल नहीं किया जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। फिलहाल कॉलेज प्रशासन और छात्राओं के बीच बातचीत का दौर जारी है।