अलवर के बानसूर क्षेत्र के पापड़दा की ढाणी में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब बोरवेल मशीन पर मजदूरी करने वाले 40 वर्षीय लेखराम यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। 20 दिसंबर को हुए एक दर्दनाक हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पांच दिनों तक चले इलाज के बाद बुधवार देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
मृतक के भाई रामनिवास यादव ने बताया कि लेखराम रेनवाल क्षेत्र के डूंगरी कला गांव में बोरवेल बोरिंग का काम कर रहे थे। इसी दौरान मशीन का एक भारी पाइप अचानक असंतुलित होकर उनकी पीठ पर गिर गया। पाइप के जोरदार प्रहार से लेखराम की रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई और वह मौके पर ही बेसुध हो गए। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद चचेरे भाई और अन्य श्रमिकों ने उन्हें चौमू के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पांच दिन तक जीवन और मौत से संघर्ष करने के बाद लेखराम की मौत हो गई। खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। लेखराम अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी और चार छोटे बच्चे दो बेटियां और दो बेटे हैं। परिजनों के अनुसार, एक बच्चा मानसिक रूप से कमजोर है, जिसकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी लेखराम पर ही थी।
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भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
लेखराम की असमय मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बच्चों के पालन-पोषण और उनके भविष्य को लेकर चिंता गहरा गई है। ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है। फिलहाल पूरे गांव में गमगीन माहौल है और लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।