जिनके खुद के सपने सच नहीं होते, वे दूसरों के सपनों को साकार करने में जुट जाते हैं। ऐसी ही एक अनूठी मिसाल पेश की है राजस्थान के अजमेर जिले के गगवाना गांव की मुस्लिम महिला सरपंच गुलजान खानम ने, जो सरपंच के साथ एक शिक्षिका का दायित्व भी निभा रही हैं।
अजमेर शहर से 15 किलोमीटर दूर गगवाना गांव की सरपंच गुलजान खानम गांव की समस्याओं के समाधान के साथ बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटी हैं। गुलजान गांव की महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गगवाना में दसवीं एवं सातवीं कक्षा की बालिकाओं को अंग्रेजी और इतिहास विषय पढ़ा रही हैं। शिक्षिकाओं की कमी की पूर्ति करते हुए वे रोजाना दो घंटे छात्राओं को समय दे रही हैं।
महिला सरपंच गुलजान खानम का कहना है कि वे युवा लड़कियों के जीवन को बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं इसलिए हर रोज गांव के सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से लड़कियों को पढ़ाने का काम कर रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार भी चाहती है की हर वर्ग की लड़कियों को उच्च शिक्षा मिले जिसे लेकर सरकार द्वारा अलग-अलग अभियान चलाए जा रहे हैं। गुलजान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सपने को आगे बढ़ाते हुए अपने गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को इंग्लिश और इतिहास नि:शुल्क पढ़ाती हैं।
वर्ष 2020 में गुलजार ग्राम पंचायत गगवाना के लिए सरपंच का चुनाव जीतकर सरपंच बनी गुलजान ने सबसे पहले ग्रामीणों को यह समझाया कि लड़कियों की कम उम्र में शादी नहीं करनी चाहिए बल्कि उन्हें शिक्षित कर अपने पैरों पर खड़ा करना चाहिए। इसी सोच के साथ गुलजान ने ग्रामीण क्षेत्र में रहकर बच्चियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
पढ़ाई के साथ कैरियर काउंसलिंग
सरपंच खानम बालिकाओं को अभी से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करा रही हैं। साथ ही उन्हें आरएएस, आईएएस व अन्य भर्ती परीक्षा की तैयारी के भी टिप्स दे रही हैं, ताकि बालिकाएं पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ें। उन्होंने बताया कि अधिकांश मुस्लिम परिवारों में बालिकाओं को बाहर पढ़ने के लिए नहीं भेजा जाता और जल्द शादी कर कर दी जाती है। ऐसे में कई बालिकाओं के सपने अधूरे रह जाते हैं। वे चाहती हैं कि गांव की अन्य शिक्षित महिलाएं भी इस अभियान में आगे आएं और बेटियों को पढ़ाने व उनकी काउंसलिंग में सहयोग करें।
बीएड करने के बाद बनीं सरपंच
गुलजान खानम सोफिया कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर उत्तीर्ण हैं। उन्होंने बीएड करने के साथ रीट एवं सीटेट परिक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। शादी होने के बाद वर्ष 2020 में वे सरपंच बनीं। पति बिलाल खान भी उन्हें इस काम के लिए प्रेरित करते हैं। स्कूल में पढ़ाई कराने के दौरान एक वर्ष के बेटे को वह अपनी मां के पास छोड़कर आती हैं।
अधिकारी बनने का सपना था
सरपंच गुलजान खानम ने बताया कि उनके पिता पुलिस में अधिकारी के पद पर तैनात थे, उन्हें देखकर उनके मन में भी प्रशासनिक अधिकारी बनने का विचार आया था लेकिन पढ़ाई खत्म होने के बाद उनकी शादी हो गई। इसके बाद पति बिलाल खान ने उन्हें सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। सरपंच बनने के बाद ग्रामीण रूढ़िवादी परंपराओं को देखते हुए उन्होंने गांव की बेटियों को आगे बढ़ाने की ठानी और उनकी पढ़ाई का जिम्मा उठाया।
गुलजान के सरपंच रहते हुए ग्रामीण बच्चियों को पढ़ाने की चर्चा गगवाना सहित पूरे राजस्थान में है।