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Ajmer News: नसीरुद्दीन चिश्ती बोले- हमने वक्फ संशोधन बिल का किया समर्थन, कुछ लोग कौम को कर रहे गुमराह

Thu, 22 Aug 2024 08:37 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

दरगाह दीवान के बेटे व उत्तराधिकारी नसीरुद्दीन चिश्ती ने गुरुवार को प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा, हमने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। मैं गरीब नवाज की औलाद हूं, कुछ लोग कौम को गुमराह कर रहे हैं।
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नसीरुद्दीन चिश्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने प्रेस वार्ता में कहा, हमने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। हमने सरकार की ओर से लाए बिल का स्वागत किया है। बिल को लेकर कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं। वक्फ में संशोधन का विरोध करना गलत है।

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नसीरुद्दीन चिश्ती बोले, वक्फ का मामला मुसलमानों से जुड़ा है। वक्फ की आड़ में किसी की संपत्ति को न हड़पा जाए। कुछ बिन्दुओं पर हमने भी बात रखी है। उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा, गुमराह होने से बचे। सरकार अच्छा कार्य कर रही है। हम सब मिलकर हुकूमत का साथ दें। कुछ बिन्दुओं में कंफ्यूजन है तो हम बात रख सकते हैं, हमारे दिल में जो आता है, हम करते हैं। कुछ लोग हैं, जो हुकूमत के साथ मिले होने का हम पर आरोप लगा रहे हैं, वो गलत है। इस एक्ट बिल को पास कराना जरूरी है। यह आपके हक में कानून बनाया जा रहा है। हमने समर्थन इसलिए किया है कि इसमें पारदर्शिता है, हिसाब-किताब रखा जाए।

वहीं, उन्होंने दरगाह खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती द्वारा दिए गए बयान पर भी पलटवार किया और कहा कि मैं गरीब नवाज की औलाद हूं। हमारा डीएनए उनसे जुड़ा हुआ है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सज्जादानशीन लिखा हुआ है। 800 साल का रिकॉर्ड हमारे पास है, आपका मकसद नया विवाद खड़ा करके कौम से लड़वाना है। पिछले तीन साल से आपने जो मैसेज दिया, दरबार से वो सब जानते हैं।
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आपको (सरवर चिश्ती) चैलेंज करता हूं कि आप यह साबित कर दें कि मैं दरगाह सज्जादानशीन नहीं हूं और गरीब नवाज की औलाद नहीं। मैं आपको 11 लाख रुपये का इनाम दूंगा। आप लोगों को गुमराह न करें, आपको बीजेपी हुकूमत और दीवान साहब से तकलीफ है, मुसलमानों के बच्चे शिक्षा चाहते हैं, कई लड़कियां घरों में बैठी हैं बिना शादी की। हमको हुकूमत पर यकीन है कि पुराने बिंदुओं पर कुछ बदलाव नहीं होगा। नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि सरवर साहब आप मुगलों की जिंदगी से बाहर निकले।

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