ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन साल 2023 में राजस्थान के चुनावी मैदान में उतरने का एलान कर चुकी है। एआईएमआईएम की राजस्थान में एंट्री कांग्रेस के लिए चुनौती साबित हो सकती है। वहीं भाजपा को इससे फायदा हो सकता है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोट काट सकती है। वहीं ओवैसी मंगलवार शाम को अपनी प्रदेश कार्यकारिणी का एलान करेंगे। इससे पहले ही वो प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
प्रदेश में मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा क्षेत्रों की बात करें, तो आदर्श नगर, किशनपोल, हवामहल, टोंक, सवाई माधोपुर, धौलपुर, पुष्कर, मसूदा, अजमेर शहर, तिजारा, लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, कामां, नगर, बीकानेर पूर्व, सरदार शहर, सूरसागर, शिव, पोकरण, मकराना, चूरू, फतेहपुर, धौलपुर, नागौर, मकराना, डीडवाना, मंडावा, नवलगढ़, नागौर, झंझुनू, सीकर और दातारामगढ़ जैसे विधानसभा क्षेत्र में ओवैसी अपने प्रत्याशी उतार सकते हैं।
असुद्दीन ओवैसी ने अपने दौरे के दौरान राजस्थान में संप्रदायिक दंगों को लेकर गहलोत सरकार पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने गहलोत सरकार को अल्पसंख्यक समुदाय के हित में काम करने की नसीहत तक दे डाली थी। माना जा रहा है कि ओवैसी चुनाव में सांप्रदायिक मामलों को हथियार बनाकर गहलोत सरकार के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरेंगे।