इस हादसे से पहले 8 जुलाई को साहिल तेजी ने अपने पिता लक्ष्मण तेजी से रात को मनाली पहुंचने से पहले मोबाइल पर आखिरी बातचीत की थी। जिसमें उसने कहा था कि पापा अभी हम चाय पीने रुके हैं। थोड़ी देर में मनाली पहुंच जाएंगे, फिर होटल में पहुंचकर आपसे आराम से बात करूंगा।
लक्ष्मण तेजी के साहिल से बड़ी एक बेटी और एक उससे छोटा बेटा भी हैं। जब साहिल का कोई फोन नहीं आया और ना ही उसके मोबाइल पर फोन लगा, दोस्तों के भी फोन नहीं लगे, तो सभी के परिजन चिंतित हो गए और अनहोनी की आशंका हुई। तभी से परिवार में सभी का रो रोकर बुरा हाल है। पिता लक्ष्मण तेजी पिछले 5 दिन से बेटे की तलाश में दिन-रात जुटे रहे। शुक्रवार सुबह जब उन्हें साहिल की फोटो दिखाई गई, तो वे टूट गए। उन्होंने कहा मेरा बेटा साहिल हमारा हीरो था, उसके दोस्त भी उसके जैसे ही थे।
8 जुलाई को जब आखिरी बार बातचीत हुई, तब वो मनाली से कुछ दूरी पर चाय पीने के लिए रुके थे। कुछ देर बाद ही वहां बादल फटने से अचानक सैलाब आया, जो उन्हें बहाकर ले गया। साहिल और लालचंद के हाथ पर बने टैटू से उनकी पहचान हो सकी। कुल्लू प्रशासन ने परिजनों को जो तस्वीरें उपलब्ध कराई हैं, उनमें से साहिल और उनके साथ के चार युवकों की शिनाख्त हो सकी है। साहिल तेजी के हाथ पर संग्राम, लालचंद के हाथ पर मानवीर और पंजा का निशान और नरेंद्र सिंह के हाथ पर भी टैटू गुदा हुआ था। बाकी तीन युवकों की तलाश जारी है।
चंडीगढ़ तक हेलिकॉप्टर से डेड बॉडी लाने की व्यवस्था में जुटे परिजन
जानकारी के मुताबिक चारों मृत युवकों की डेड बॉडी को मनाली से चंडीगढ़ तक हेलिकॉप्टर से लाया जाएगा। वहां से एम्बुलेंस से दिल्ली और जयपुर होते हुए अजमेर के ब्यावर तक घर लाया जाएगा। राजस्थान सरकार ने सीनियर आईएएस कुलदीप रांका और आरती डोगरा को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। जो हिमाचल सरकार और कुल्लू प्रशासन से संपर्क कर इन युवकों के शवों को ब्यावर तक पहुंचाने की व्यवस्था में जुटे हैं।
20-20 लाख रुपए सहायता राशि देने की मांग
ब्यावर से विधायक शंकरसिंह रावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर मृत युवकों के शवों को विशेष विमान से ब्यावर लाने की व्यवस्था कराने और प्राकृतिक आपदा में मृत युवकों परिजनों को 20-20 लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी है।