जानकारी के अनुसार राहुल के माता-पिता ने उसे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल दिया। इसके लिए उन्होंने घर पर बाईफाई भी लगवाया था। इस कारण नेट की कोई समस्या नहीं थी, इसलिए वह ज्यादातर समय मोबाइल पर गेम खेलकर ही बिताता था। परिजनों को इसका पता चला तो उन्होंने उसे गेम नहीं खेलने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माना।
परिजनों ने राहुल के साथ ज्यादा टोका-टाकी की तो वह दो बार गुस्सा होकर घर से चला गया। परिजनों ने बड़ी मुश्किल से उसे रेवाडृी में तलाश किया और पकड़कर घर लाए। इसके बाद अप्रैल से मई तक उसे घर में बांधकर रखा। इसी बीच उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने उसे जयपुर के एक अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। अभी उसे अलवर के एक हॉस्टल में रखा गया है, जहां मनोरोग चिकित्सक और साइकोलॉजिस्ट उसका इलाज कर रहे हैं। साथ ही स्पेशल काउंसलर भी उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।
हारना नहीं चाहता खिलाड़ी और पड़ जाती है लत
पबजी और फ्री फायर गेम की सबसे बड़ी बात ये है कि इस गेम को खेलने वाला कोई भी खिलाड़ी हारना नहीं चाहता। अगर, वह हार जाता है तो जीतने के लिए गेम को बार-बार खेलता है। इससे उसे गेम खेलने की लत पड़ जाती है। कई बार बच्चे इस गेम का इस कदर शिकार हो जाते हैं कि वे आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं।