मुश्किल से जान बचाकर आए हैं
जो लौटे हैं, उनमें से ज्यादातर सिंधी बोलते हैं। ईश्वर लाल मिट्टी का काम करते हैं और गंगा का मार्ग बनाने में भागीरथ के लिए भी काम इनके ही पूर्वजों ने किया था। एक और पाकिस्तानी रायचंद ने बताया कि बड़ी मुश्किल से इज्जत बचाकर आए हैं। 16 साल का प्रकाश कहता है कि धर्म के नाम पर गाली-गलौज होती है। मारते हैं। स्कूल में टीचर कहता था कि मुसलमान नहीं बने तो पिटाई होगी। स्कूल में टॉयलेट सिर्फ हिंदुओं से साफ कराते थे। गंदे कपड़े साफ करवाते थे।
महिलाओं की स्थिति और भी बदतर
इन 41 हिंदुओं में कई महिलाएं और बच्चियां हैं। राजपूत समाज से ताल्लुक रखने वाली अमीरा ने कहा कि वहां मजदूरी सिर्फ हिंदू महिलाओं से कराते थे। बच्ची अगर बाहर जाएगी तो उठा ले जाएंगे। न पुलिस सुनती है और न ही कोर्ट। प्रिया सात साल की थी, आज तक नहीं लौटी। लड़कियों को न पढ़ने का अधिकार है और न ही बाहर निकलने की इजाजत। हिंदुओं के लिए न कोई पुलिस है और न ही कानून। सपना और काजल नाम की लड़कियों ने भी बताया कि वहां तो घर से बाहर नहीं निकलने देते थे।
निमितेकम सोसाइटी कर रही है मदद
इन 41 हिंदुओं को जयपुर की संस्था निमितेकम सोसाइटी मदद कर रही है। उनके रहने-खाने की व्यवस्था सोसाइटी ने ही की है। सोसाइटी के जय आहूजा ने बताया कि संस्था अब तक 12 हजार प्रवासियों की मदद की है। इनमें से पांच हजार को भारत की नागरिकता दिलवा चुके हैं।