विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महामंत्री ने आगे कहा कि आज पूरी दुनिया में चर्च बदनाम हो चुका है। पिछले दिनों फ्रांस के एक आयोग ने खोजपूर्ण लेकिन खौफनाक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि 3,30,000 से अधिक बच्चों का यौन शोषण पादरियों द्वारा किया गया। ननों के यौन शोषण के आरोपों से वेटिकन सिटी भी अछूता नहीं रहा। भारत में तो कई ननें इसी कारण आत्महत्या भी कर चुकी हैं। जालंधर का बिशप फ्रैंको ननों के यौन शोषण का आरोपी है और केरल की अदालत में उस पर मुकदमा चल रहा है। पूरे विश्व का चर्च अपने पादरियों के पापों पर माफी मांग रहा है, परंतु बिशप फ्रैंको को जमानत मिलने पर पंजाब के ईसाई समाज ने बड़ी बेशर्मी के साथ उसका स्वागत किया था।
पंजाब का सिख और हिंदू समाज चर्च की इस बेशर्मी और चरित्र हीनता को बर्दाश्त नहीं कर सकता। विश्व हिंदू परिषद् को विश्वास है कि धर्मांतरण के विरोध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अकाल तख्त की इस पहल के बाद अब पंजाब में धर्मांतरण पर पूर्ण विराम लगेगा। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 150 जत्थे निकालने के निर्णय का विहिप स्वागत करती है और आग्रह करती है कि विहिप के कार्यकर्ताओं को भी इन जत्थों में शामिल किया जाए। विहिप और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी मिलकर पंजाब को धर्मांतरण के इस पाप से पूर्ण रूप से मुक्त करा सकती है।
विहिप पंजाब सरकार से भी अपील करती है कि वह पंजाबी समाज की भावनाओं तथा गुरुओं की परंपराओं का सम्मान करते हुए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए। हम मिशनरियों को चेतावनी देते हैं कि वे धर्मांतरण की गतिविधियों को अविलंब बंद करें अन्यथा उन्हें पंजाब से अपना बोरिया बिस्तर लपेटने पर मजबूर होना पड़ेगा। बिशप फ्रैंको तथा अन्य पादरियों के पापों के लिए माफी मांग कर उन्हें बताना चाहिए कि अब मिशनरियों को सभ्य बनाने के लिए भारत का चर्च भी गंभीर है।