एक माह से पठानकोट में लगातार संदिग्धों की मूवमेंट देखी जा रही है। इन सभी संदिग्धों को कुछ सेना की वर्दी पहने, कुछ काले कपड़ों में हथियारों के साथ और कुछ कंधों पर भारी भरकम बैग के साथ देखा गया है ।
पठानकोट में संदिग्धों के दिखने का सिलसिला नहीं थम रहा। गुरुवार देर रात गांव फंगतोली में तीन संदिग्ध देखे गए है। इससे पहले इसी गांव में एक महिला ने सात संदिग्ध देखे थे जिनका अभी तक सुरक्षा एजेंसियां कोई पता नहीं लगा पाई है।
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फंगतोली के पास ही मामून सैन्य क्षेत्र है। 26 जून से अब तक पठानकोट में 17 संदिग्धों को देखा जा चुका है। हालांकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अभी तक इस बारे में कोई सफलता नहीं मिली है।
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जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात गांव फंगतोली में तीन संदिग्ध एक घर में दीवार फांद कर घुसे और रोटी मांगने लगे। डरे परिवार ने दरवाजा नहीं खोला। बलराम सिंह ने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और घातक कमांडो फोर्स ने चप्पे-चप्पे को खंगाला। इस गांव में जब सात संदिग्ध दिखे थे तभी से पुलिस और सेना सर्च चला रही है, लेकिन अभी तक उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा है।
बदीवार फांद रोटी मांगने आए तीन संदिग्ध फंगतोली निवासी बलराम सिंह ने बताया कि देर रात दो बजे के करीब तीन हथियारबंद उनके घर दीवार फांद घुसे और दरवाजा खटखटाते हुए रोटी मांगने लगे। तीनों संदिग्ध लाल रंग की लेजर टार्च कमरे की तरफ करते हुए डोगरी भाषा कहने लगे हमें रोटी दो नहीं तो तुम हमारे गन प्वाइंट पर हो। बलराम ने कहा कि जब पुलिस को सूचना देने की कोशिश की तो मोबाइल और वाइफाइ के नेटवर्क नहीं मिल रहे थे। तीनों ने काले कपड़े पहने और कंधों पर भारी भरकम बैग उठा रखे थे। परिवार डर के मारे बाहर नहीं निकला और तीनों वापिस लौट गए। फिर जैसे तैसे पुलिस को पूरी घटना संबंधी सूचना दी। इन संदिग्धों की मूवमेंट के चलते जिले में दहशत का माहौल बना हुआ है। पुलिस और सेना सुबह से ही सर्च चला रही है। अभी तक फोर्स के हाथ खाली है।
रजिंदर सिंह निवासी फंगतोली ने बताया कि मामून क्षेत्र सबसे बड़ा जिले का सेन्य क्षेत्र से भी जाना जाता है। वहीं, जो संदिग्ध अब फंगतोली में आ रहे है यह घर जंगलों के बिलकुल पास में हैं। जंगलों के साथ जेएंडके सीमा भी लगती है। कहा कि उक्त संदिग्ध स्थानीय लोगों के बच्चों को अगवा भी कर कई तरह की साजिशें रच सकते हैं। स्थानीय लोगों में इन संदिग्धों की इतनी दहशत बन चुकी है कि लोगों ने कामकाज पर जाना छोड़ दिया है।