डेरामुखी राम रहीम के फरलो पर 21 दिन के लिए जेल से बाहर आने पर उनके समर्थकों में खुशी की लहर है, लेकिन डेरा समर्थकों की सियासी ‘खामोशी’ ने सभी राजनीतिक दलों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि विभिन्न राजनीतिक दल, डेरा मुखी की फरलो को मुद्दा बनाकर भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। इस प्रकरण को भाजपा की चाल बता उस पर सियासी लाभ लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
वोट बैंक खिसकता देख चिंता में हैं सियासी दल
डेरा मुखी की पेरोल पर रिहाई ने सियासी दलों को चिंता में डाल दिया है। वोट बैंक के खिसकने की आशंका को देखते हुए अकाली दल सीधे तौर पर इसे भाजपा की चाल बता रहा है। अन्य दल भी इस प्रकरण को लेकर भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि आम आदमी पार्टी इस मामले में बयान देने से बच रही है। सियासी जानकार मान रहे हैं कि इस प्रकरण के पीछे भाजपा के चाणक्य माने जाते गृहमंत्री अमित शाह की योजना काम कर रही है। हरियाणा की भाजपा सरकार के नरम लहजे को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
मालवा की अधिकांश सीटों पर बन सकते हैं नए समीकरण
डेरा फैक्टर का प्रभाव समूचे मालवा इलाके में है और समर्थकों का रुख मालवा की अधिकांश सीटों पर नए समीकरण को जन्म दे सकता है। इससे किसी एक दल का नहीं बल्कि अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग दलों का संतुलन बिगड़ सकता है। कडे़ मुकाबले वाली सीटों पर बड़ा उलटफेर होने के अनुमान अभी से लगाए जा रहे हैं।
मालवा के बठिंडा, मानसा, संगरूर, बरनाला, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब समेत अन्य जिलों में डेरा सिरसा के लाखों की संख्या में अनुयायी हैं। डेरे के सियासी विंग का इशारा भर, सियासी हवा का रुख बदलने की क्षमता रखता है और समर्थकों का मिजाज किसी भी राजनीतिक दल पर भारी पड़ सकता है। डेरा समर्थकों की मानें तो हरेक विस सीट पर 20 से 30 हजार वोट को प्रभावित करने का दावा किया जा रहा है।
समर्थकों में हलचल तेज, ऐन वक्त होगा फैसला
डेरा सिरसा से जुडे़ श्रद्धालुओं में हलचल तेज हो गई है और अनुयायी, डेरा मुखी की रिहाई पर खुशी जता रहे हैं। इस संबंधी डेरा सिरसा के ब्लाक अध्यक्ष शैबर सिंह ने कहा कि सियासी तौर पर कोई फैसला नहीं हुआ है। डेरा मुखी का जो भी आदेश होगा उसका पालन हर हाल में किया जाएगा। मतदान से कुछ समय पहले कोई फैसला हो सकता है।