परिजनों से मिलकर भावुक हुईं श्रुति।
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फतेहगढ़ साहिब की सब डिवीजन अमलोह के वार्ड नंबर 5 की मेडिकल छात्रा श्रुति लुटावा सकुशल यूक्रेन से अपने घर लौट आई है। वह तीन साल पहले एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गई थीं। दिल्ली एयरपोर्ट से सीधा मंडी गोबिंदगढ़ पहुंची श्रुति लुटावा का परिवार ने एक होटल में भव्य स्वागत किया। श्रुति को देख पूरे परिवार की आंखों में खुशी के आंसू भर आए।
दादा-दादी, माता-पिता समेत परिवार के समूह सदस्यों ने श्रुति को बांहों में लेकर एक नई जिंदगी का एहसास व्यक्त किया। इस दौरान श्रुति ने बताया कि वह यूक्रेन से अपने घर तक बिना कोई पैसा खर्च किए वापस आई है जिसके लिए वह सरकार का धन्यवाद करती है। उसने बताया कि 23 फरवरी को वह रात समय अपने हॉस्टल में रुकी थी तो 24 फरवरी की सुबह करीब चार बजे गोलाबारी शुरू हो गई। पूरी इमारत हिलने लगी उसके बाद वहां की सरकार द्वारा सायरन की परिभाषा समझने की बार-बार लोगों से अपील की जा रही थी।
एक बार सायरन बजने का मतलब खतरा पैदा होने वाला है। दूसरी बार सायरन बजने का मतलब आप जहां कहीं भी हो अपनी सुरक्षा के लिए कहीं छिपकर या बंकर में बैठ जाओ और तीसरी बार सायरन बजने का मतलब बम आसपास कहीं गिरा है। तीसरा सायरन बजने का मतलब जीवित रहने की उम्मीद कम रह जाती थी। उसने अपने दोस्तों को साथ सामान बांधा और एयरपोर्ट की ओर चल पड़े। अगर न्यूक्लियर हमला होता तो शायद छिपकर भी जान नहीं बचा पाते। जब दिल में डर पैदा होता था तो सबसे पहले अपने परिवार की याद आती थी।
श्रुति ने बताया कि एमबीबीएस करने के लिए उसकी 6 वर्ष की पढ़ाई थी, 3 वर्ष बीत चुके हैं और तीन वर्ष की पढ़ाई बची है। उसका अब तक करीब 12 लाख रुपये खर्च आया है। उसने केंद्र सरकार से मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए इंडिया में ही बेहतर विकल्प प्रदान करवाएं। उसने कहा कि वह अब अपने परिवार के साथ ही रहेंगी, यूक्रेन नहीं जाएगी।
इस अवसर पर विधानसभा हलका अमलोह से भाजपा के उम्मीदवार कंवरवीर सिंह दोहड़ा ने श्रुति लुटावा के पूरे परिवार को बधाई दी और भरोसा दिया कि उनके हलके के बीच जितने भी बच्चे यूक्रेन युद्ध में फंसे हुए हैं उनको सकुशल भारत लाने के लिए वह और उनकी सरकार वचनबद्ध है।