ठेका और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) को पहले दिन ही लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा। हड़तालियों में बड़ी संख्या में चालक और परिचालकों के शामिल होने की वजह से पीआरसीटी के बेड़े में शामिल आधी से ज्यादा बसें रूटों पर नहीं भेजी जा सकीं। फिलहाल कर्मचारियों ने हड़ताल के बेमियादी होने की घोषणा कर रखी है। ऐसे में यह नुकसान आने वाले दिनों में करोड़ों में जाने की आशंका है। इससे कारपोरेशन मैनेजमेंट काफी चिंतित है।
इस संबंध में पीआरटीसी के जनरल मैनेजर सुरिंदर सिंह का कहना है कि उम्मीद है कि ठेका कर्मचारियों की हड़ताल जल्द खत्म होगी। वरना नुकसान काफी हो सकता है। अकेले लुधियाना डिपो को पहले ही दिन लगभग 20 लाख रुपये का झटका लगा है। हड़ताल के कारण लुधियाना डिपो से सिर्फ 10 फीसदी सरकारी बसें चल रही हैं। सरकारी बस कर्मचारियों की इस हड़ताल का निजी बस चालकों ने खूब फायदा उठाया।
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक हड़ताल के कारण पंजाब के अलग-अलग डिपो पर 700 बसें खड़ी रहीं, जबकि केवल 400 बसें ही रेगुलर स्टाफ के सहारे विभिन्न रूटों पर चलाई जा सकीं। ऐसे में पीआरटीसी को हड़ताल के पहले ही दिन 90 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इनमें 60 लाख पीआरटीसी को नकद में मिलना था जबकि 30 लाख महिलाओं को मुफ्त दी जा रही बस सफर सुविधा का है, जिसका भुगतान पंजाब सरकार की ओर से बाद में किया जाता है। इस समय कारपोरेशन को बसों से रोजाना करीब एक करोड़ 40 लाख की आमदनी हो रही है।
पनबस, पंजाब रोडवेज, पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर सोमवार को ठेका व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने कामकाज छोड़कर सीएम सिटी में बस अड्डे के अंदर जोरदार धरना दिया। इस मौके पर सरकार से वादे मुताबिक सभी ठेका व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की। इसे लेकर मंगलवार को मोती महल का घेराव करके पक्का मोर्चा शुरू करने का एलान किया गया।
अमृतसर में लिपिक स्टाफ ने चलाईं बसें
अमृतसर में तो बस चालकों और कंडक्टरों की हड़ताल का एक और पहलू भी सामने आया। रोडवेज के अधिकारियों ने पिछले लंबे समय से दफ्तरों में काम कर रहे अपने लिपिक स्टाफ को बसों को चलाने पर लगा दिया। गुलजार सिंह ने बताया कि उन्होंने कई साल बाद बस चलाई, क्योंकि वे लंबे समय से दफ्तरी काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने उन्हें बस चलाने की जिम्मेदारी दी है तो वे बसों को चला रहे हैं।
यात्री हुए परेशान
जालंधर की बुजुर्ग पूर्ण लता ने बताया कि वह सुबह ही जालंधर से अमृतसर अपने रिश्तेदार के पास आई थी। बस चालकों व कंडक्टरों की हड़ताल के चलते दो घंटे में बस मिली। जबकि अन्य दिनों में हर पांच मिनट बाद बस स्टैंड से एक सरकारी बस निकलती है।
वही धारीवाल की प्रभजोत कौर ने बताया कि रोडवेज के चालकों का हड़ताल का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा है। वैसे तो रूटीन में वे सरकारी बस में जीरो टिकट लेकर सफर करती थी लेकिन सोमवार टिकट लेकर भी बस में सवार होने के लिए करीब तीन से चार घंटों तक इंतजार करना पड़ा।
तरनतारन की सुमन ने बताया कि वह अमृतसर में एक प्राइवेट बैंक में काम करती हैं। बैंक में समय पर पहुंचने के लिए वह सुबह एक घंटा पहले घर से निकल पड़ी। इसके बावजूद बैंक पहुंचने में पौना घंटा देरी हो गई। इसी तरह स्नेहलता ने बताया कि वह बटाला में एक स्कूल में अध्यापिका है। उन्हें पता था कि सोमवार को बस चालकों की हड़ताल है तो उन्होंने सरकारी बस के बजाय निजी बस में सफर करना बेहतर समझा।