कहां-कितना रहा तापमान
अमृतसर का सोमवार को अधिकतम तापमान 21.4, लुधियाना का 24.9, पटियाला का 25.8, पठानकोट का 25.0, बठिंडा का 29.0, गुरदासपुर का 26.0, बरनाला का 24.8, फतेहगढ़ साहिब का 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है। मोगा का 24.8, जालंधर का 24.7 व रोपड़ का 25.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सबसे अधिक 30.7 डिग्री सेल्सियस तापमान बलौवाल सौनखेड़ी का दर्ज किया गया।
अमृतसर में मंडी में पड़ा धान भीगा
अमृतसर की मुख्य अनाज मंडी भगतांवाला में खुले आसमान के नीचे पड़ा लाखों क्विंटल धान भीग गया। इसमें अधिकांश धान सरकारी और निजी एजेंसियों का खरीदा है। वहीं हजारों क्विंटल किसान का धान भी भीग गया है। बारिश सोमवार सुबह से दोपहर तक जारी रही है। बताया जा रहा है कि करीब साढ़े तीन लाख बोरी धान भीगा है। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह छीना और राकेश तुली ने बताया कि मंडियों में पिछले दो तीन दिनों में काफी मात्रा में धान की आमद हुई है। खरीदे गए धान की लिफ्टिंग समय पर न होने के कारण खुले में पड़ा धान भीग गया है।
फिरोजपुर में खेतों में बिछी फसल
उधर, फिरोजपुर में तेज आंधी व बारिश से खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल बिछ गई। अभी तक मंडियों में बहुत कम धान पहुंचा है। ज्यादातर किसानों ने धान की फसल की कटाई नहीं की है। जो धान मंडियों में पहुंचा है, वह भी गीला हो गया है। मौसम को देख किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसान सतनाम सिंह का कहना है कि धान में 22 फीसदी नमी के चलते अभी फसल की कटाई नहीं की थी लेकिन तेज आंधी व बारिश ने उनकी खेत में खड़ी फसल जमीन पर बिछा दी है। उधर, जलालाबाद में भी रिमझिम बारिश से खुले आसमान तले पड़ी धान की फसल भीग गई है। ममदोट में भी यही हाल रहा।
पटियाला में किसानों पर दोहरी मार
पटियाला में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ जहां बारिश व ओलावृष्टि से कईं गावों में धान की फसल खेतों में गिर गई है। वहीं दूसरी तरफ शैलर मालिकों की लगातार चल रही हड़ताल से मंडियों में लिफ्टिंग का काम भी प्रभावित है। इससे किसान हताश हैं। उधर, मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी गुरनाम सिंह ने माना कि बीते तीन से चार दिनों में जिले के करीब 32 गांवों में धान की फसलों को बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान पहुंचा है। फसलें गिरने से दाना बेरंग होने की आशंका है। इससे धान की कटाई देरी से होगी और बिक्री में भी किसानों को दिक्कत आ सकती है।
लुधियाना और जालंधर की मंडियों में भी यही हाल
लुधियाना में सोमवार सुबह मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। बारिश से सलेम टाबरी और गिल रोड दाना मंडी में धान की बोरियां भीग गईं। कई दिनों से लिफ्टिंग न होने की वजह से धान भीगा है। वहीं तिरपाल की कमी की वजह से किसान धान को भीगने से नहीं बचा सके। गौरतलब है कि सरकार और शैलर मालिकों के बीच रेट को लेकर विवाद चल रहा है। इस वजह से लिफ्टिंग रुकी है। किसानों ने सरकार से जल्द विवाद सुलझाने की मांग की है।
जालंधर में भी बारिश से धान की फसल मंडियों में भीग गई। मंडियों से धान की लिफ्टिंग न होने की वजह से बोरियों का अंबार लगा है। हालांकि फसल को तिरपाल से ढका तो गया है लेकिन पानी भरने से नीचे की बोरियां भीग गई हैं। जालंधर दाना मंडी के प्रधान कश्मीरी लाल का कहना है कि बारिश से कुछ ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन कुछ फसल भीगी जरूर है। इससे किसानों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
मंडी में खुले असमान तले पड़ा हजारों टन धान भीगा
सोमवार सुबह करीब चार बजे हुई जोरदार बारिश से मुक्तसर की अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ा हजारों टन धान की फसल भीग गई है। इससे पहले रविवार को भी कुछ देर हुई बरसात से धान भीग गया था। डिप्टी कमिश्नर डॉ. रूही दुग ने दो दिन पहले ही मौसम विभाग द्वारा जारी बरसात के अलर्ट को लेकर मंडी बोर्ड के अधिकारियों को धान की संभाल के प्रबंध मुकम्मल करने के निर्देश दे दिए थे। मगर इसके बावजूद प्रबंध पूरे नहीं किए गए जिसके चलते सोमवार लगातार दूसरे दिन मंडी में पड़ी धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।