कांग्रेस में दिख रहा है पंजाब में कलह का असर
पंजाब में कांग्रेस के भीतर मची रार का असर अब पार्टी मुख्यालय में साफ दिखाई देने लगा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने अपनी ही पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष पर सवाल उठा दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने चिट्ठी लिखकर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाने की मांग की और मनीष तिवारी की प्रतिक्रिया आई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार भी मानते हैं कि कैप्टन पंजाब में पार्टी के बड़े कद के नेता हैं। पंजाब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी खुल कर नाराजगी जाहिर की। इसी तरह से कांग्रेस के भीतर पंजाब की स्थिति को लेकर दो फाड़ की स्थिति है। तमाम राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने पंजाब में बिन बुलाई आफत मोल ले ली है। पंजाब को लेकर पूरी चर्चा में लोग पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के हस्तक्षेप को कांग्रेस के लिए बड़ी सुनामी बता रहे हैं। इस स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा को 24 अकबर रोड के मंच से पार्टी के नेताओं को फोरम पर ही अपनी बात कहने की अपील करनी पड़ी।
क्या कर सकते हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह?
दो बातें तो कैप्टन ने खुद बताई। पहली तो यह कि वह भाजपा में शामिल नहीं होंगे। दूसरी, कांग्रेस में अब अपना अपमान नहीं सहेंगे और इस्तीफा देंगे। क्या नया राजनीतिक दल बनाएंगे? इस सवाल को कैप्टन ने केवल सुना और चुप रह गए। दरअसल, कैप्टन जाट सिख हैं। नवजोत सिंह सिद्धू भी जाट सिख हैं। पंजाब और पंजाबियों में यह एक रसूखदार वर्ग है। समझा यही जा रहा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जाट सिखों के साथ अन्य नेताओं को जोड़कर नई पार्टी का गठन कर सकते हैं। ऐसा होने पर उनके साथ कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता भी आसानी से शामिल हो सकते हैं। इस तरह से वह पंजाब में कांग्रेस का बड़ा नुकसान कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि दिल्ली में भी वह इसी राह को आसान करने आए थे। इसकी एक बड़ी वजह किसान आंदोलन भी बताई जा रही है।