पंजाब में कारोबार करना कितना आसान है, सर्वे में इस बाबत सवाल पूछे गए थे। केवल 9 फीसदी लोगों ने कहा, कांग्रेस पार्टी की सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में कारोबार करना आसान हुआ है। 28 फीसदी बोले, ईज ऑफ डुईंग बिजनेस, में सुधार नहीं है। 27 फीसदी ने कहा, ये पहले से भी खराब हो गया है। 36 फीसदी ने कहा, यह बुरी हालत में पहुंच गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को 30 प्रतिशत लोगों ने अच्छा बताया है। 34 फीसदी लोगों ने कहा, कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में सांप्रदायिक सौहार्द्र की भावना बढ़ी है, उसमें सुधार हुआ है। 32 फीसदी लोगों ने कहा, कोई सुधार नहीं हुआ। पंजाब में बिजली को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में 27 फीसदी लोग बोले, उनके जिले में पावर सप्लाई व्यवस्था में सुधार हुआ है। कैप्टन सरकार के दौरान ग्रामीण इलाकों में लंबे पावर कट के खिलाफ किसानों के अनेक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
पेयजल सप्लाई बाबत पूछे गए सवाल पर 16 फीसदी लोगों ने कहा, साढ़े चार साल के दौरान इसमें कुछ सुधार आया है। कुछ समय पहले ही पंजाब कैबिनेट ने एक योजना लागू की थी। इसमें अवैध कनेक्शन को नियमित किया गया। इसके बदले बकाया बिलों के एरियर की वसूली की गई। नाबार्ड और आरआईडीएफ द्वारा 445.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। 58 प्रतिशत लोगों ने कहा, पेयजल सप्लाई में कोई सुधार नहीं हुआ। नौ फीसदी लोगों ने इसे खराब बताया तो 17 फीसदी लोगों का मानना था कि यह सिस्टम बहुत ही ज्यादा खराब हो चुका है। 27 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिन्होंने माना है कि पंजाब में इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में सुधार आया है।
शिक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर 31 फीसदी लोगों का कहना था कि स्कूली शिक्षा में सुधार हुआ है। एनएसओ सर्वे के मुताबिक, पंजाब में साक्षरता दर 83.7 फीसदी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवंबर 2020 में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'मिशन शत प्रतिशत' शुरु किया था। प्राइमरी स्कूलों में 8393 शिक्षकों के पद स्वीकृत किए गए थे। राज्य में 19107 स्कूलों में से 6832 स्मार्ट स्कूल हैं। डिजिटल प्लेटफार्म पर सौ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वायु गुणवत्ता के मामले में साढ़े चार साल के दौरान पंजाब को केवल चार फीसदी लोगों ने एक्सीलेंट बताया है। अक्तूबर 2020 में पराली जलाने के 25976 मामले सामने आए थे। 31 फीसदी लोगों ने कहा, काम तो हुआ, मगर उसका रिजल्ट नहीं निकला। 46 फीसदी लोगों का कहना था कि सरकार ने इस दिशा में कुछ किया ही नहीं। 15 प्रतिशत का कहना था, हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए हैं।