पंजाब के नवनियुक्त डीजीपी गौरव यादव मैदान में हैं और जमीनी स्तर पर पुलिस अधिकारियों से सीधा संवाद कर उन्होंने अधिकारियों को मजबूत के लिए हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया है। पंजाब में ड्रग व गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस का ऑपरेशन चल रहा है और ऐसे में गौरव यादव जमीनी स्तर के अधिकारियों को मजबूत करने में जुट गए हैं।
2012 में जब अकाली दल भाजपा सत्ता में आई तो सुखबीर बादल ने पंजाब के तमाम पुलिस स्टेशनों का भौगोलिक नक्शा इस तरह से तैयार करवा दिया था कि एक विधायक के नीचे उसके तमाम पुलिस स्टेशन व डीएसपी स्तर का अधिकारी आने लगा था। इस तरह से पंजाब में 117 डीएसपी सब डिवीजन बनाकर लगाए गए। तय किया गया कि इलाके में एसएचओ व डीएसपी विधायक की मर्जी से तैनात होगा। इसका असर यह हुआ कि तमाम पुलिस अधिकारी विधायकों व मंत्रियों की शरण में चले गए। विधायकों की कोठी में बैठकर केसों को रद्द करने, एफआईआर दर्ज करने यहां तक कि जिमनी लिखने का सिलसिला चल पड़ा था और 2022 के विधानसभा चुनावों तक यह सिलसिला जारी रहा।
कैप्टन के कार्यकाल में भी पुलिस विधायकों के नीचे का फार्मूला जारी रहा, जिससे पुलिस का काफी राजनीतिकरण हो गया। इससे पुलिस अधिकारियों को भी अपने हाथ बंधे लगने लगे थे। यही वजह थी कि तस्करी के धंधे तक में कई राजपत्रित अधिकारियों के नाम सामने आ गए। लेकिन अब नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है और गौरव यादव निचले स्तर के अधिकारियों को राजनीतिकरण से निकालने में लग गए हैं। वह सीधा संवाद कर डीएसपी से लेकर एसपी तक को हिदायतें जारी कर रहे हैं कि काम सही करें, लोगों को इंसाफ दें, किसी भी प्रेशर के नीचे आकर गलत कार्य स्वीकार नहीं होगा।