चंडीगढ़ में सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह।
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किसान आंदोलन को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही। कृषि कानूनों के विरोध में दो माह से अधिक समय से दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के धरने और 26 जनवरी को दिल्ली में हुए उपद्रव को लेकर कैप्टन ने मंगलवार को चंडीगढ़ में सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद जलालाबाद में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के काफिले पर हुए हमले की खबर पर माहौल गर्मा गया। शिअद नेताओं ने हमले के पीछे कांग्रेस का हाथ होने का आरोप लगाया। किसानों की चर्चा के बजाय बैठक शिअद नेताओं पर हुए हमले पर केंद्रित हो गई। शिअद नेताओं ने आरोप लगाया कि यह हमला सुनियोजित था और इस हमले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हाथ है। कैप्टन ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है।
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चंडीगढ़ के पंजाब भवन में शुरू हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह, सहकारिता मंत्री सुखजिंदर रंधावा, शिअद और आम आदमी पार्टी के नेता मौजूद रहे। बैठक से पंजाब भाजपा के नेताओं ने किनारा किया और एक भी नेता नहीं पहुंचा।
चंडीगढ़ में भाजपा नेताओं ने किसानों के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सर्वदलीय बैठक को ढकोसला बताया है। भाजपा महासचिव सुभाष शर्मा और जीवन गुप्ता ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। मुख्यमंत्री सर्वदलीय बैठक को बुलाकर सिर्फ ढकोसला कर रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं पर हमला कर निशाना बना रहे हैं। इसके बाद भी कैप्टन चुप हैं। उन्होंने कहा कैप्टन का एक ही मकसद है कि इस आंदेालन से कैसे सियासी लाभ लिया जा सकता है।