एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने बताया कि सिख इतिहास की संभाल के लिए सिख इतिहास रिसर्च बोर्ड नामक नई कमेटी का गठन किया गया है जिसमें प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. कृपाल सिंह चंडीगढ़, प्रो. प्रिथीपाल सिंह कपूर पूर्व वीसी गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, डॉ. प्रो. बलवंत सिंह ढिल्लों गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, डॉ. बलकार सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी, डॉ. हरचंद सिंह बेदी गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, डॉ. सरबजिंदर सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला को शामिल किया गया है।
वहीं विदेशों में सिखों पर हो रहे नस्ली हमलों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इस पर ठोस नीति से काम करने और सिखों पर हो रहे हमलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कमर कसी है। सात अप्रैल को अमृतसर के तेजा सिंह समुद्री हॉल में एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ द्वारा बुलाई गई बैठक में 21 सदस्यों वाली सब कमेटी का गठन किया गया था। इसकी दूसरी बैठक 11 मई को अमृतसर में सुबह 11 बजे होगी। इसमें प्रसिद्ध विद्वानों, सामाजिक जत्थेबंदियों के नुमाइंदों के अलावा निहंग सिंहों की तरफ से बाबा बलबीर सिंह प्रमुख बूढ़ा दल, संत समाज की तरफ से ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा भी शामिल होंगे।
जत्थेदार मक्कड़ ने कहा कि यह कमेटी सिख इतिहास रिसर्च बोर्ड के असली मकसद को उजागर करने के लिए पूरी भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि सिख इतिहास के साथ संबंधित पुस्तकें, जो लुप्त हो चुकी हैं, को पुन: प्रकाशित करने, सिख इतिहास का सृजन करने और लोगों में भ्रम की निवृत्ति दूर करन के लिए सिख इतिहास रिसर्च बोर्ड अपनी अहम भूमिका निभाएगा। एसजीपीसी प्रवक्ता दिलजीत सिंह बेदी ने बताया कि विदेशों में हो रहे सिखों पर नस्ली हमलों को रोकने हेतु तेजा सिंह समुद्री हॉल में 11 मई को बैठक बुलाई गई है, ताकि सिखों पर हो रहे हमले के खिलाफ ठोस नीति पर काम किया जा सके।