पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित सेमिनार में पहुंची शख्सियतों को सम्मानित करते वीसी डा. जसपाल सिंह।
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की व्याख्याकारी अकादमिक स्तर पर करने के प्रयास होना चाहिए। एक व्याख्याकार के लिए गुरवाणी का शुद्ध पाठ करने का अभ्यास जरूरी है। कोई भी व्याख्या अंतिम नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी व्याख्याकार की निंदा नहीं करनी चाहिए, बल्कि सत्कार सहित अपने वाजिब सुझाव देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम समाज के सामूहिक विकास की बात करते हैं, तो गुरु ग्रंथ साहिब की बनावट शामिल है। इसमें सभी वर्गों को स्थान दिया गया है।
वह पंजाबी यूनिवर्सिटी के श्री गुरु ग्रंथ साहिब अध्यनन विभाग की ओर से एसजीपीसी के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर वीसी ने आए मेहमानों को पुस्तकों के सेट देकर सम्मानित किया।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की व्याख्याकारी और व्याख्याकार विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के डा. दर्शन सिंह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी के व्याख्याकारी के लिए अरबी, संस्कृत, उर्दू और गुरमुखी भाषाओं का अच्छा ज्ञान होना आवश्यक है। गुरवाणी राग पर आधारित है, इसलिए व्याख्याकार को संगीत संबंधी ज्ञान होना चाहिए।
समागम के विशेष मेहमान श्री अकाल तख्त साहिब अमृतसर के पूर्र्व जत्थेदार ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती ने कहा कि गुरवाणी की व्याख्या गुरु काल से शुरू हो गई थी और निरंतर जारी है। उन्होंने आगे कहा कि व्याख्याकार को वाणी का शुद्ध उच्चारण करना आना चाहिए। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर से डा. परमजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि गुरवाणी की व्याख्या को ऐतिहासिक और सैद्धांतिक दो पक्षों से देखा जा सकता है।