पंजाब सरकार के 2022 के विधानसभा चुनावों को लेकर किए जा रहे वादों से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) मुश्किल में है। हालात यह है कि वर्तमान में चन्नी सरकार पर 5917.23 करोड़ की सब्सिड़ी राशि बकाया है। इनमें खेतीबाड़ी, इंडस्ट्री व घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही सुविधाओं की सब्सिडी राशि शामिल है। उधर पंजाब सरकार के इस रवैये से मुलाजिम जत्थेबंदियों में खासा रोष है।
अमर उजाला से बात करते विभिन्न मुलाजिम नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि अगर वोटों की राजनीति के लिए पावरकॉम को इसी तरह से इस्तेमाल किया जाता रहा, तो इसके दिवालिया होने में ज्यादा समय नहीं है। साथ ही कहा कि पंजाब सरकार के इन चुनावों वादों से पावरकॉम तो मुसीबत में है ही, साथ ही इसका असर मुलाजिमों व आगे जाकर उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।
महीनों तक नहीं होता सब्सिडी का भुगतान
पीएसईबी इंप्लाइज ज्वाइंट फोरम के प्रदेश सचिव कर्मचंद भारद्वाज ने कहा कि कोई भी पार्टी जो सत्ता में होती है, वह अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए विभिन्न वर्गों को रियायत पर या फिर मुफ्त बिजली यूनिट देने के वादे कर देती है। इसमें कोई बुराई नहीं अगर पंजाब सरकार इसका भुगतान करती रहे। लेकिन अकसर महीनों तक सब्सिडी राशि का भुगतान नहीं होता है। जिसका नतीजा यह होता है कि पावरकॉम को अपने खर्चे पूरे करने के लिए बैंकों से लोन लेना पड़ता है। इस लोन पर लाखों रुपये ब्याज देने से पावरकॉम और वित्तीय बोझ में डूब रहा है। जिसका खामियाजा मुलाजिमों व पेंशनरों को उठाना पड़ रहा है। उन्हें समय पर सैलरियां व पेंशनें नहीं मिलती है।
होने लगी सामान की कमी
टेक्निकल सर्विसेज यूनियन के प्रदेश प्रधान कुलदीप सिंह खन्ना ने कहा कि सरकार का यही रवैया रहा तो पावरकॉम का दिवालिया निकल जाएगा। अगर सरकार वादा करती है, तो समय पर सब्सिडी का पावरकॉम को भुगतान भी करे। यह नहीं कि वोटें लेने को पावरकॉम पर आर्थिक बोझ लाद दे। उन्होंने बताया कि पावरकॉम के स्टोरों में पहले ही बिजली लाइनों की मरम्मत व इसकी देखरेख को जरूरी साजो सामान जैसे केबल, ट्रांसफार्मर व खंबों आदि की कमी है। ऐसे में सब्सिडी न मिलने से आय में ज्यादा कमी होने से सामान की खरीद-फरोख्त और प्रभावित होगी। इससे बिजली लाइनों की मेंटनेंस न होने से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। जिसका खामियाजा घरेलू उपभोक्ताओं के साथ इंडस्ट्रीज को उठाना पड़ेगा।
एडवांस में हो सब्सिडी का भुगतान
बिजली मुलाजिम एकता मंच के प्रदेश प्रवक्ता मनजीत सिंह चाहल के मुताबिक वोटों के लिए सरकार को मुफ्त में सुविधाएं देने की राजनीति बंद करनी चाहिए। इसकी जगह पंजाब में रोजगार के साधन पैदा करने को इंडस्ट्रीज आदि लगाई जाएं। अगर फिर भी मुफ्त में बिजली यूनिट देने हैं, तो एडवांस में इसका भुगतान सरकार द्वारा पावरकॉम को किया जाए। जिससे मुलाजिमों को समय पर सैलरियां व पेंशनरों को पेंशनें मिल सकें।
आने वाले समय में बढ़ सकती हैं बिजली दरें
हेडऑफिस ज्वाइंट एक्शन कमेटी पावरकॉम के प्रदेश प्रधान अवतार सिंह कैंथ के मुताबिक पहले जहां साथ के साथ रिटायर होने वाले मुलाजिमों को उनके पेंशनरी बेनीफिट जैसे ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट बगैरा का भुगतान हो जाता था। वहीं अब इसमें दो से तीन महीनों तक का समय लगने लगा है। अगर सरकार समय से सब्सिडी का भुगतान नहीं करेगी, तो पावरकॉम के लिए मुश्किलें बढ़ेगी। घाटे से उबरने के लिए आखिरकार पावरकॉम के लिए एक ही रास्ता रहेगा कि बिजली दरें बढ़ाई जाएं। इसका एकमात्र हल यही है कि सरकार समय से सब्सिडी राशि का भुगतान करें।