पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट बरकरार है। गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट के पूरी तरह से बंद पड़ने और तलवंडी साबो व रोपड़ के एक-एक यूनिट बंद होने से आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित चल रही है। बुधवार को भीषण गर्मी के चलते सूबे में बिजली की मांग 7500 मेगावाट से अधिक दर्ज की गई, जबकि पॉवरकाम के पास सभी साधनों से बिजली की उपलब्धता सिर्फ 4400 मेगावाट के करीब रही। हालांकि इस अंतर को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से बिजली ली, लेकिन फिर भी पर्याप्त सप्लाई न होने के कारण बुधवार को भी ग्रामीण इलाकों में चार से पांच घंटे और कंडी के इलाकों में छह घंटे तक कट लगाने पड़े।
जानकारी के मुताबिक वर्तमान में तलवंडी साबो में डेढ़ दिन, रोपड़ में 9, लहरा मुहब्बत में सात, राजपुरा में 15 दिन का कोयला शेष है, जबकि गोइंदवाल साहिब में कोयला का स्टाक खत्म होने के चलते मंगलवार को इस प्लांट की दो यूनिटें बंद पड़ चुकी हैं, जो बुधवार को भी बंद रहीं। इससे सीधे 540 मेगावाट बिजली आपूर्ति कम पड़ गई है। बुधवार को भी तलवंडी साबो की 660 मेगावाट की एक यूनिट और रोपड़ की 210 मेगावाट की एक यूनिट बंद रही। इस तरह से कुल 1410 मेगावाट बिजली की सप्लाई नहीं हो सकी।
10 रुपये प्रति यूनिट की दर से 2900 मेगावाट बिजली खरीदी
गर्मी के तीखे तेवरों के कारण राज्य में बुधवार को बिजली की मांग 7500 मेगावाट से अधिक रही। इसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को अपने थर्मलों रोपड़ व लहरा मुहब्बत से 1400 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 420 मेगावाट, प्राइवेट प्लांटों से 2506 मेगावाट और सोलर व अन्य साधनों से कुल 4400 मेगावाट बिजली मिली। ऐसे में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पावरकॉम ने बाहर से 10 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से करीब 2900 मेगावाट बिजली खरीदी। लेकिन फिर भी मांग व सप्लाई में अंतर रहने के चलते गांवों में लोगों को कटों का सामना करना पड़ा।
जून से पछवाड़ा खान से शुरू हो जाएगी कोयले की सप्लाई
पावरकॉम के अधिकारियों का कहना है कि जून से पावरकॉम को अपनी पछवाडा (झारखंड) खान से कोयले की सप्लाई शुरू हो जाएगी। जिससे स्थिति में सुधार होगा। साथ ही पैडी सीजन में किसानों को दिक्कतें न हों, इसके लिए बिजली खरीद समझौते भी किए गए हैं।