किसी तरह की शारीरिक अक्षमता आपके अंदर की प्रतिभा को बांध नहीं सकती। बस हौसले बुलंद होने चाहिए। इस कहावत को पटियाला जिले के पातड़ां निवासी जगविंदर सिंह (30) ने सच कर दिखाया है।
जगविंदर बताते हैं कि यहां तक पहुंचने का उनका सफर बेहद मुश्किल रहा। जब किसी स्कूल ने उन्हें दाखिला न दिया तो माता अमरजीत कौर ने घर पर पैरों से लिखना और ड्राइंग करना सिखाना शुरू किया। बाद में बड़ी मुश्किल से जब दाखिला मिला तो वहां साथ पढ़ने वाले बच्चे तरह-तरह के ताने मारते थे लेकिन उनकी मां लगातार उन्हें गुरू की तरह आगे बढ़ने को प्रेरित करती रहीं।
2012 में जब टीवी पर जगविंदर ने ओलंपिक गेम्स देखे तो उनके मन में साइकिलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपने अभिभावकों व देश का नाम ऊंचा करने का जज्बा जगा। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने जिम में ट्रेनिंग करके खुद को शारीरिक रूप से मजबूत किया। इसके बाद हफ्ते में तीन से चार बार वह 25 किलोमीटर साइकिल चलाने का अभ्यास करने लगे। धीरे-धीरे अपने परिवार व दोस्तों के सहयोग से उनकी मेहनत रंग लाई और कई मुकाबलों में हिस्सा लेकर पुरस्कार जीते। जगविंदर सिंह का सपना पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है।
पटियाला के पैरा साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर का कहना है कि जगविंदर सिंह के साथ उनकी लव मैरिज है। शादी को डेढ़ साल हो गया है। दुराचार मामले में सुखप्रीत कौर ने इंस्टाग्राम पर इसे समाज के लिए दुखदायी बताते हुए एक पोस्ट की थी, जिसे जगविंदर सिंह ने लाइक किया था। इसके बाद उन दोनों की दोस्ती हो गई। एक दिन सुखप्रीत कौर ने जगविंदर को शादी के लिए प्रपोज कर दिया। इस तरह दोनों की शादी हो गई। सुखप्रीत कौर पहले रंगमंच की कलाकार थीं।