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राष्ट्रीय युवा दिवस: आधे बाजू देख किसी स्कूल ने नहीं दिया दाखिला, जगविंदर सिंह ने पैरों से लिख दी सफलता की इबारत

Wed, 12 Jan 2022 11:24 AM IST
पंजाब ब्‍यूरो रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)

सार

हौसलों व जज्बे से पटियाला के जगविंदर सिंह ने सफलता की शानदार इबारत लिखी दी। जन्म से ही जगविंदर सिंह के दोनों बाजू आधे हैं। एक समय ऐसा था कि किसी स्कूल ने उन्हें दाखिला नहीं दिया। हालांकि बाद में उन्हें प्रवेश मिला लेकिन उनका संघर्ष जारी रहा। 
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जगविंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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किसी तरह की शारीरिक अक्षमता आपके अंदर की प्रतिभा को बांध नहीं सकती। बस हौसले बुलंद होने चाहिए। इस कहावत को पटियाला जिले के पातड़ां निवासी जगविंदर सिंह (30) ने सच कर दिखाया है।

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जन्म से ही जगविंदर सिंह के दोनों बाजू आधे हैं लेकिन अपनी माता अमरजीत कौर की प्रेरणा से जगविंदर सिंह ने अपनी इस कमी को ताकत बनाया। इसी की बदौलत आज वह एक शानदार पैरा साइकिलिस्ट हैं। साथ ही पैरों से खूबसूरत पेंटिंग भी करते हैं।

वह कई पैरा साइकिलिंग मुकाबलों में हिस्सा लेकर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। इसी वजह से उन्हें आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग की ओर से जिला आइकॉन के तौर पर चुना गया है। जगविंदर साइकिल पर विभिन्न हलकों का दौरा कर जहां युवाओं को उनके वोट डालने के अधिकार का इस्तेमाल करने को प्रेरित कर रहे हैं। वहीं दिव्यांगों को भी मतदान के लिए आगे आने को अपील कर रहे हैं।
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अमर उजाला से बात करते हुए जगविंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में चंडीगढ़ साइकिलिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित प्रदेश स्तर की पैरा साइकिलिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। 2015 में ओडिशा में हुई इंटरनेशनल साइक्लोथोन में उन्होंने कांस्य जीता। जबकि 2014 में पटियाला में ग्रीन बाइकर एसोसिएशन द्वारा आयोजित 212 किलोमीटर साइक्लोथोन को जगविंदर ने 9 घंटे 15 मिनट में पूरा किया। जबकि 2000 में इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर ने जगविंदर को उनके कला के क्षेत्र में योगदान के लिए गोल्ड मेडल देकर नवाजा।

 

जगविंदर बताते हैं कि यहां तक पहुंचने का उनका सफर बेहद मुश्किल रहा। जब किसी स्कूल ने उन्हें दाखिला न दिया तो माता अमरजीत कौर ने घर पर पैरों से लिखना और ड्राइंग करना सिखाना शुरू किया। बाद में बड़ी मुश्किल से जब दाखिला मिला तो वहां साथ पढ़ने वाले बच्चे तरह-तरह के ताने मारते थे लेकिन उनकी मां लगातार उन्हें गुरू की तरह आगे बढ़ने को प्रेरित करती रहीं।

2012 में जब टीवी पर जगविंदर ने ओलंपिक गेम्स देखे तो उनके मन में साइकिलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपने अभिभावकों व देश का नाम ऊंचा करने का जज्बा जगा। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने जिम में ट्रेनिंग करके खुद को शारीरिक रूप से मजबूत किया। इसके बाद हफ्ते में तीन से चार बार वह 25 किलोमीटर साइकिल चलाने का अभ्यास करने लगे। धीरे-धीरे अपने परिवार व दोस्तों के सहयोग से उनकी मेहनत रंग लाई और कई मुकाबलों में हिस्सा लेकर पुरस्कार जीते। जगविंदर सिंह का सपना पैरा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है।

पटियाला के पैरा साइकिलिस्ट जगविंदर सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर का कहना है कि जगविंदर सिंह के साथ उनकी लव मैरिज है। शादी को डेढ़ साल हो गया है। दुराचार मामले में सुखप्रीत कौर ने इंस्टाग्राम पर इसे समाज के लिए दुखदायी बताते हुए एक पोस्ट की थी, जिसे जगविंदर सिंह ने लाइक किया था। इसके बाद उन दोनों की दोस्ती हो गई। एक दिन सुखप्रीत कौर ने जगविंदर को शादी के लिए प्रपोज कर दिया। इस तरह दोनों की शादी हो गई। सुखप्रीत कौर पहले रंगमंच की कलाकार थीं। 

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