पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी के दो विभागों का विलय करके अब एक नया इतिहास और पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग बनाया गया है। पीयू में इतिहास विभाग और पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग का विलय किया गया है। वीसी प्रोफेसर अरविंद के मुताबिक अकादमिक स्तर को ऊंचा उठाने और विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार के लिए यह फैसला लिया गया है। दोनों विभागों में चल रहे सभी कोर्स पहले की तरह ही जारी रहेंगे।
वीसी प्रोफेसर अरविंद ने कहा कि इस फैसले के लागू होने से दोनों विभागों में उपलब्ध अध्यापन और शोध से जुड़ी सभी सुविधाओं को संयुक्त तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। ऐसा होने से अध्यापन और शोध कार्यों में निखार आने की संभावनाएं हैं। इसके साथ उन्होंने साफ किया कि दो विभागों के मर्जर के बाद बना नया विभाग बहुत सारी अकादमिक ग्रांटों के लिए अपनी योग्यता आसानी से पूरा कर लेगा। विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से अकादमिक ग्रांट या प्रोजेक्ट प्रदान करते समय संबंधित विभाग में अध्यापकों की गिनती या अन्य सुविधाओं बारे शर्तें रखी जाती हैं। दोनों विभागों का अध्यापन और शोध से जुड़ा स्टाफ एक जगह होने से कई शर्तें अपने आप पूरी हो गई हैं।
नए बने विभाग के प्रमुख डा. दलजीत सिंह ने बताया कि पिछले काफी समय से इन दोनों विभागों को विलय करने की मांग उठ रही थी। किसी कारणवश ऐसा हो नहीं पा रहा था। अब सिंडीकेट की मीटिंग में इतिहास विभाग और पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग का विलय करके एक नया विभाग इतिहास और पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग बनाने की मंजूरी दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि मर्जर के बाद स्थापित नया विभाग अपनी संयुक्त क्षमता कारण अब यूजीसी स्पेशल असिस्टेंस प्रोग्राम के लिए योग्य हो गया है। इसी तरह से 60 लाख रुपये की फंडिंग वाली सीएएस ग्रांट, 50 लाख रुपये फंडिंग वाली डीएसए ग्रांट और 40 लाख रुपये की फंडिंग वाली डीआरएस ग्रांट प्राप्त करने के लिए जो मापदंड तय होते हैं, उसके योग्य हो गया है।
इतिहास विभाग के साथ जुड़ी महाराणा प्रताप चेयर भी अब इस नए विभाग के साथ सांझे रूप में जुड़ सकेगी। इस चेयर के पास सात करोड़ रुपये का फंड है। उन्होंने बताया कि पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग के सभी फैकेल्टी सदस्यों के पास मध्यकालीन भारतीय इतिहास की पड़ताल और इसकी व्याख्या का तुजुर्बा है, जो नए विभाग सभी स्टूडेंट्स और शोधकर्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा। इसके साथ उन्होंने उम्मीद जताई कि हाल ही में जीते गए किसानी संघर्ष के साथ जुड़े इतिहास लेखनी जैसे काम अब इस नए समक्ष विभाग की ओर से बेहतर ढंग से किए जा सकेंगे।