पंधेर ने कहा, अगर शंभू बाॅर्डर पर जल्द बिजली की सप्लाई न दी तो जाम करेंगे
कंगना रणौत से हिमाचल के सेब बागवानों के मसले उठाने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब सरकार के खिलाफ शनिवार को राजपुरा के गगन चौक जाम के कार्यक्रम को किसान जत्थेबंदियों संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा ने फिलहाल टाल दिया है। जत्थेबंदियों ने सरकार को और समय दे दिया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि जत्थेबंदियों की मांग थी कि शंभू बाॅर्डर पर डटे किसानों की सुविधा के लिए यहां पर बिजली सप्लाई के लिए ट्रांसफार्मर लगाया जाए। लेकिन मांग पूरी न होने के चलते शनिवार को गगन चौक जाम का ऐलान किया था। लेकिन सरकार की अपील पर फिलहाल इस कार्यक्रम को टाल दिया है। लेकिन अगर सरकार ने जल्द इस मांग को पूरा न किया , तो इस बार किसान पीछे नहीं हटेंगे। पंधेर ने बताया कि शंभू बाॅर्डर पर बिजली के साथ-साथ पीने के पानी, सेहत सेवाएं और साफ-सफाई का प्रबंध करने की मांग की गई थी।। सरकार से दो दौर की बातचीत के बाद पानी, सेहत सेवाओं व साफ-सफाई की मांगें मान ली गई हैं। पानी के टैंकर शंभू बाॅर्डर पहुंच गए हैं। मनरेगा के तहत शंभू बाॅर्डर पर साफ-सफाई कराने की बात भी मान ली गई है। सेहत सेवाओं के तहत दो एंबुलेंस बाॅर्डर पर खड़ा कर दी गई हैं और मोबाइल शौचालय की भी व्यवस्था कर दी है, लेकिन बिजली के ट्रांसफार्मर अभी तक बाॅर्डर पर नहीं लगाए गए हैं। इससे शंभू बाॅर्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल किसानों को काफी दिक्कत हो रही है।
मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों का करेंगे पर्दाफाश
पंधेर ने कहा कि रविवार को हरियाणा के जींद में रैली की जा रही है, जिसमें मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों का पर्दाफाश किया जाएगा। पंधेर ने दावा किया कि इस रैली में ऐतिहासिक इकट्ठ होगा। इससे मोदी सरकार को किसानों की ताकत का अंदाजा हो जाएगा। इसके बाद 22 सितंबर को हरियाणा के पिपली में रैली की जाएगी। इस मौके पंधेर ने सांसद व बालीबुड अभिनेत्री कंगना रणौत को हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के मसले उठाने की मांग की। पंधेर ने कहा कि सेब बागवानों को प्रति क्विंटल 1500 रुपये कम रेट मिल रहा है। उनके सेब अडानी की कंपनी ही खरीद रही है। इसी तरह से बासमती का भी 1000 रुपये कम रेट मिल रहा है। किसानों को उनकी लागत भी पूरी नहीं मिल रही है। केंद्र की मोदी सरकार को इसका खामियाजा हरियाणा, महाराष्ट्र व जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा।