रोपड़ में शिक्षामंत्री के खिलाफ नारेबाजी करती नौकरी से निकाली गई महिला शिक्षाकर्मी।
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पंजाब सरकार के शिक्षा मंत्री डा. दलजीत सिंह चीमा द्वारा हलके के गांवों के विकास कार्यों के लिए चेक बांटने के रखे कार्यक्रम में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब कि फारग (नौकरी से निकालीं) महिला शिक्षा कर्मियों ने पंडाल में पहुंचकर उनके खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस का खुफिया तंत्र भी फेल होता दिखाई दिया। प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद खुफिया तंत्र के कर्मी भी हैरान रह गए और अपनी सफाई देते हुए इसे गुप्त प्रोग्राम बताने लगे।
प्रदर्शन कर रही महिला फारग शिक्षा कर्मी नारेबाजी करते हुई शिक्षा मंत्री की ओर बढ़ने लगीं तो मौके पर मौजूद कुछ युवा अकाली नेतायों ने सामने से सरकार के पक्ष में नारेबाजी करते हुए इन्हें रोका जबकि मौके पर मौजूद थाना सिटी के एसएचओ कम सुरक्षा कर्मी होने के कारण महिलाएं के प्रदर्शन के आगे विफल दिखाई दे रहे थे। इस दौरान सारे पंडाल में जहां सरकार के हक में नारेबाजी होने लगी वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन कर रहीं फारग शिक्षा कर्मियों ने भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी।
काफी समय बाद सिविल वर्दी में आए डीएसपी हरबीर सिंह अटवाल ने प्रदर्शन कर रहीं शिक्षा कर्मियों को पहले तो शिक्षा मंत्री से मीटिंग करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में पुलिस बस में बैठाकर थाना सिटी में भेज दिया। इस दौरान थाना सदर के एसएचओ रमिंदर सिंह काहलों समेत महिला पुलिस भी कुछ ही समय बाद पहुंच गए। शिक्षा मंत्री डा दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि प्रदर्शन कर रही फारग शिक्षा कर्मियों को विभाग में नहीं रखा जा सकता। ऐसा कोई कानून नहीं है कि इन्हें विभाग में भर्ती किया जा सके जबकि हाईकोर्ट ने भी इस संबंध में जजमेंट दे दी है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सलाह दी कि वह टीईटी पास कर लें ओर विभाग द्वारा निकाली हुई पोस्टों के लिए आवेदन दें।