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कोयले का संकट बरकरार, मात्र दो से 19 दिनों का कोयला बचा

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पटियाला। पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट अभी भी बना हुआ है। थर्मलों में दो से 19 दिनों का कोयला ही बचा है। रविवार को पंजाब में बिजली की मांग जहां 7300 मेगावाट के करीब रही, वहीं इसे पूरा करने के लिए पावरकॉम के पास केवल 4000 मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता रही। जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को बाहर से महंगे दामों में बिजली खरीदनी पड़ी।
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रोपड़ थर्मल प्लांट में आठ, लहरा मुहब्बत में पांच, राजपुरा में 19, तलवंडी साबो में पांच और गोइंदवाल में दो दिनों का कोयला शेष है। कोयले की कमी के चलते ही इस समय रोपड़, लहरा, तलवंडी साबो और गोइंदवाल की एक-एक यूनिट बंद पड़ी है। कोयले के इस संकट के चलते सरकारी व प्राइवेट थर्मल प्लांटों की कुल 15 यूनिटों में से चार बंद पड़ी हैं। इससे करीब 1390 मेगावाट बिजली सप्लाई ठप पड़ गई है। जिससे पावरकाम की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि गरमी के बढने के साथ-साथ अब पैडी सीजन भी नजदीक है। माहिरों का मानना है कि अगर यही हाल रहा, तो पैडी सीजन में पंजाब में बिजली की बड़ी किल्लत होगी और उपभोक्ताओं को लंबे कटों का सामना करना पड़ सकता है। रविवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 7300 मेगावाट रही, जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम के पास उपलब्धता 4000 मेगावाट की रही। इसमें से पावरकॉम को अपने रोपड़ व लहरा प्लांटों से 1043 मेगावाट, राजपुरा, तलवंडी व गोइंदवाल से 2627 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों व अन्य साधनों से करीब 4000 मेगावाट बिजली मिली। सारे देश में ही इन दिनों कोयले का संकट होने के चलते मार्केट में बिजली महंगी है। इसी के चलते रविवार को भी पावरकॉम ने महंगे दामों पर बिजली खरीद मांग को पूरा किया। केवल कंडी इलाकों में ढाई घंटों तक के कट लगे।
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