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साइलेंट वोटर को भाजपा मान रही ताकत, शहरी व ग्रामीण वोटर की चुप्पी ने बदले समीकरण

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राजपुरा। अपने दम पर पहली बार चुनाव मैदान में उतरी भाजपा को साइलेंट वोटरों पर पूरा भरोसा है। वह उसे अपनी ताकत मान रही है, लेकिन शहरी व ग्रामीण वोटरों की चुप्पी ने सभी प्रत्याशियों के समीकरण बदल कर रख दिए हैं। वहीं भाजपा की असली ताकत आरएसएस के सभी संगठन अदृश्य रहकर जमीनी स्तर पर अपने तरीके से कार्य को अंजाम दे रहे हैं जो घर-घर जाकर पार्टी के वोट पक्के कर रहे हैं।
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पंजाब सहित राजपुरा में भी भाजपा की जड़े मजबूत करने के लिए भारत विकास परिषद, सेवा भारती, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, बीएमएस, राष्ट्रीय सिख संगत, धर्म जागरण, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती सहित दो दर्जन से ज्यादा संगठन भाजपा के लिए समर्थन जुटाने के लिए अंदरखाते अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ किसान संगठन भाजपा से नाराज चल रहे हैं उन्हें समझाने के लिए सिख चेहरों के साथ किसान मोर्चा व अन्य मोर्चो के आगू जमीन तैयार कर वोट बैंक पक्का करने का प्रयास कर रहे हैं।
चुनाव के दौरान मोदी सरकार की नीतियों को अपनाया जा रहा है, जिसमें मोदी सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी स्कीमों की जानकारी दी जा रही है। मोदी सरकार के कार्यों का हवाला देकर शहरी मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की तैयारी चल रही है। इसके बावजूद भी शहरी व ग्रामीण मतदाता भाजपा को खुले तौर पर समर्थन देने के लिए कतरा रहे हैं और चुपचाप वोट देने का भरोसा दे रहे हैं। इस भरोसे को भाजपा अपनी बड़ी ताकत के रूप में देख रही है और इसे अपना सबसे बड़ा गेम चेंजर मान रही है। शहर में डेरा प्रेमियों के वोट भी भाजपा को मिलने की चर्चाओं का बाजार गर्म है जिस कारण सभी राजनीतिक दलों की नींद उड़ी हुई है कि डेरा प्रेमी जो मालवा क्षेत्र की सभी सीटों पर अपनी पकड़ रखते हैं वह किसकी तरफ मुड़ने वाले हैं इस पर सबकी नजर है।
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