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Patiala: नाभा की नई जिला जेल में काला पीलिया का कहर, 800 कैदियों की जांच में 148 निकले पीड़ित

Wed, 02 Nov 2022 04:35 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)

सार

हेपेटाइटिस-सी के आधे से ज्यादा मरीजों को खुद के संक्रमित होने का पता ही नहीं चलता है। इसकी कोई वैक्सीनेशन भी उपलब्ध नहीं है। यह वायरस संक्रमित खून से फैलकर मरीज के लीवर को क्षति पहुंचाता है, जिससे मरीज का लीवर फेल हो सकता है व उसे कैंसर होने का भी खतरा बन जाता है।
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हेपेटाइटिस-सी - फोटो : iStock
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विस्तार
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पटियाला के नाभा की नई जिला जेल में हेपेटाइटिस-सी (काला पीलिया) ने कहर बरपा दिया है। सेहत विभाग की ओर से जेल के 800 कैदियों की टेस्टिंग में 148 कैदी काला पीलिया की बीमारी के शिकार पाए गए हैं। इससे विभाग समेत जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 

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नाभा के कार्यकारी एसएमओ डॉ. प्रदीप अरोड़ा ने बताया कि एक ही सिरिंज से नशे लेने की वजह से इस बीमारी के जेल में फैलने की आशंका है। उन्होंने कहा कि जो कैदी काला पीलिया के शिकार पाए गए हैं, उनके आगे के जरूरी टेस्ट करवाकर जल्द इलाज शुरू किया जाएगा। साथ ही बाकी के रहते कैदियों की भी जल्द टेस्टिंग कराई जाएगी। 

पंजाब की जेलों में कैदियों के नशे की लत के आदी होने की बात अब छिपी नहीं है। हाल ही में जेलों में कराए ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट से यह साफ हो गया है कि जेलों में बड़ी संख्या में कैदी नशे की गिरफ्त में हैं, लेकिन अब इसी नशे के कारण कैदी अलग-अलग तरह की जानलेवा बीमारियों के भी शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही मामला नाभा की नई जिला जेल से सामने आया है। नाभा जेल के 800 कैदियों की अक्तूबर के पहले व दूसरे हफ्ते में जांच की गई थी। इस दौरान टेस्टिंग में 148 कैदी हेपेटाइटिस सी यानी काला पीलिया के शिकार पाए गए हैं। 
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नाभा के कार्यकारी एसएमओ डॉ. प्रदीप अरोड़ा के मुताबिक सरकार की तरफ से उन्हें 800 कैदियों की टेस्टिंग के लिए ही किटें भेजी गई थीं। इसके तुरंत बाद सैंपल लेकर जांच कराई गई, जिसमें 148 कैदी काला पीलिया की बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। काला पीलिया के शिकार कैदी 22 से 50 वर्ष के हैं। 

खतरनाक है काला पीलिया, लीवर फेल व कैंसर भी हो सकता है
उन्होंने बताया कि यह बीमारी इसलिए भी काफी खतरनाक है, क्योंकि आधे से ज्यादा मरीजों को खुद के संक्रमित होने का पता ही नहीं चलता है। इसकी कोई वैक्सीनेशन भी उपलब्ध नहीं है। यह वायरस संक्रमित खून से फैलकर मरीज के लीवर को क्षति पहुंचाता है, जिससे मरीज का लीवर फेल हो सकता है व उसे कैंसर होने का भी खतरा बन जाता है।

जानकारी के मुताबिक नाभा जेल में इस समय करीब 1200 कैदी हैं। एसएमओ ने बताया कि जल्द ही बाकी के 400 मरीजों की भी टेस्टिंग की जाएगी, जिससे इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है, लेकिन विभाग की ओर से मरीजों को अच्छा इलाज दिया जाएगा।

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