शपथ ग्रहण समारोह में परिवार के साथ पहुंचे ब्रह्म शंकर जिंपा।
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भगवंत मान के मंत्रिमंडल में 10 मंत्री शामिल हुए हैं। मालवा और माझा के दबदबे वाले कैबिनेट में दोआबा को सिर्फ एक मंत्री मिला है। वह भी होशियारपुर से ब्रह्म शंकर जिंपा। एक समय था जब जालंधर से चार या पांच कैबिनेट मंत्री पंजाब सरकार में होते थे। अकाली दल भाजपा गठबंधन की सरकार हो या कांग्रेस की, दोआबा को हमेशा बेहतर प्रतिनिधित्व मिलता रहा है।
दोआबा की 42 फीसदी दलित आबादी को भी नजरअंदाज किया गया है। यहां से दलित सीटों पर आप के कई उम्मीदवार जीते हैं। दोआबा में 23 तो माझा में 25 विधानसभा सीट हैं। दोआबा में आम आदमी पार्टी ने 10 सीट जीती हैं जबकि माझा से 16 सीट। मान ने जिन दस मंत्रियों को शपथ दिलाई है, उसमें माझा के चार मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें हरभजन सिंह ईटीओ, भोआ से लाल चंद, अजनाला से कुलदीप सिंह धालीवाल और पट्टी से लालजीत सिंह भुल्लर शामिल हैं। दोआबा से महज बह्मशंकर जिंपा को कैबिनेट में स्थान दिया गया है। वह सामान्य वर्ग से हैं जबकि दोआबा में दलितों की आबादी 42 फीसदी है।
दोआबा के जालंधर से चार विधायक हैं, जिसमें दो दलित बलकार सिंह व शीतल अंगुराल हैं। गढ़शंकर से जय सिंह रोडी के अलावा शाम चौरासी से दलित विधायक डॉ. रवजोत ग्रेवाल हैं। कांग्रेस सरकार ने जालंधर से परगट सिंह को, कपूरथला से राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाया था। इससे पहले अकाली दल भाजपा सरकार में होशियारपुर से तीक्ष्ण सूद, मनोरंजन कालिया, अकाली दल से सरवण सिंह फिल्लौर मंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस ने 2002 में जालंधर से ही चार मंत्री बना दिए थे। जिसमें नकोदर से अमरजीत सिंह समरा, जालंधर शहरी से अवतार हेनरी, मोहिंदर सिंह केपी, करतारपुर से चौधरी जगजीत सिंह शामिल थे। भाजपा ने भी दोआबा के दलितों को उचित प्रतिनिधित्व दिया है। दोआबा से ही एक सांसद लगातार दूसरी बार केंद्र सरकार में मंत्री है। 2014 में विजय सांपला तो 2019 में सोमप्रकाश केंद्रीय राज्यमंत्री बने।
अब जालंधर समेत समूचे दोआबा क्षेत्र को कैबिनेट के दूसरे विस्तार का इंतजार है। इसमें कयास लग रहे हैं कि शायद कैबिनेट में दोआबा और विशेषकर जालंधर के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा जाएगा। दोआबा रविदासिया समाज का केंद्र है और यहां पर दलितों की आबादी 42 फीसदी होने के कारण सियासत का केंद्र बिंदु है। माझा में 16 विधायकों में से 4 को मंत्री बनाने से दोआबा की सियासत गर्म हो गई है। आप के विधायक दबी जुबान से कह रहे हैं कि दोआबा और माझा की विधानसभा सीट बराबर हैं तो मंत्री पद के लिए बराबरी होनी चाहिए।