अस्पताल पहुंचने पर उनको बताया गया कि अस्पताल की तरफ से सिविल सर्जन दफ्तर को मेल भेजकर सूचित कर दिया गया है। उनके मरीज का शव जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल ने उन्हें नगर निगम से संपर्क करने और मृतक के दाह संस्कार का प्रबंध करने को कहा। इसके बाद उनके साथ आए पार्षद अशोक झा ने निगम अधिकारियों से संपर्क कर संस्कार के लिए 2 बजे का समय ले लिया।
उन्होंने बताया कि करीब साढ़े 11 बजे अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें बिल भरने को कहा। वह पैसे जमा करवाने काउंटर पर गए तो वहां बैठे अस्पताल स्टाफ ने उन्हें बताया कि उनका मरीज तो जिंदा हैं और उनका इलाज चल रहा है। इसके बाद अस्पताल वालों ने उन्हें पीपीई किट पहनाकर वार्ड में ले जाकर उनके पिता को दिखाया, जो कि बेहोश थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में किसी अन्य मरीज की मौत हुई थी। जबकि अस्पताल प्रबंधन ने गलती से उन्हें फोन कर दिया था। इसके बाद शाम करीब 6 बजे अस्पताल प्रबंधन ने परिवार को जानकारी दी कि उनके मरीज की हार्ट अटैक से मौत हो गई है।
दूसरे मामले में एक परिवार को सौंपा किसी और का शव, पता गलत होने पर हुआ बवाल
वहीं एक दूसरे मामले में अस्पताल में बुलाए गए एक अन्य मरीज के रिश्तेदारों ने जब मृतक का चेहरा देखा तो उन्होंने उसे ले जाने से इनकार कर दिया। क्योंकि परिजनों का आरोप था कि जो शव उन्हें सौंपा गया है, वह किसी और व्यक्ति का है। उन्होंने कहा कि मरीज का नाम भले ही ठीक है लेकिन मरीज के पिता का नाम और पता किसी और का है। वहीं पता चला है कि पहले गलती से मरीज के पते में डेराबस्सी की जगह अंबाला लिख दिया गया था। इसके बाद जांच करने पर यह मामला निपट गया था। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया