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नगर परिषद ने अपना किया सुधार, आम जनता को अभी भी है इंतजार

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नयागांव। सरकारी और आम आदमी में फर्क होता है। यह साबित किया है। नयागांव नगर परिषद ने। पिछली बारिश में नयागांव की नगर परिषद का दफ्तर भी जलमग्न हो गया था। शुक्रवार को फिर बारिश हुई, लेकिन परेशानियों का सामना करना पड़ा, आम लोगों को। क्योंकि परिषद ने अपने दफ्तर में ऊंचा रैंप बनवाकर टाइल लगवा लीं, लेकिन सड़कों और सीवरेज की हालत सुधारने पर ध्यान नहीं दिया। यही वजह रही कि शनिवार को जहां नगर परिषद दफ्तर शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद भी साफ सुथरा था, वहीं शहर की सड़कें कीचड़ और मलबे से भरी थीं। हालांकि पिछले साल साफ-सफाई पर साढे़ 13 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए थे।
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इलाके में शुक्रवार देर रात हुई बारिश के बाद मुख्य बाजार में पानी की निकासी पाइपों से निकलकर के मलबा जमा हो गया। इस कारण शनिवार को दिन भर लोगों को परेशानी और बदबू का सामना करना पड़ा। वहीं व्यापारी अपनी दुकानें तक नहीं खोल पाए। सुबह-सुबह अपने रोजगार के लिए जाने वाले लोगों को भी काफी मुश्किल झेलनी पड़ी। नगर परिषद ने पिछले साल साफ-सफाई के ठेके पर तकरीबन 13 करोड़ 58 लाख रुपये खर्च किए थे। इलाके में बारिश से एक तरफ जहां गर्मी से राहत मिली।
वहीं दूसरी तरफ इलाका वासियों को अलग-अलग प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ा। इस मानसून में यह पहली बार नहीं है जब इलाके के मुख्य बाजार में मलबे के कारण हालात खराब हुए हैं। जब भी इलाके में बारिश होती है तो पानी निकासी के पाइपों से निकलकर मलबा मार्केट में जमा हो जाता है। सुबह व्यापारी जब अपनी दुकान खोलने के लिए पहुंचे तो यह देखकर वह भी हैरान रह गए। दुकानदारों का कहना है कि नगर परिषद अगर समय समय पर निकासी पाइपों की सही तरीके से सफाई करवाए तो यह हालात पैदा न हों।
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बता दें कि कुछ दिन पहले बारिश में नगर परिषद दफ्तर में पानी भर गया था। दफ्तर के कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय में भी लगभग एक से डेढ़ फुट पानी भर गया था। मामला मीडिया में आने के बाद नगर परिषद के कर्मचारी हरकत में आए और अपने दफ्तर को पानी से बचाने के लिए दफ्तर के मुख्य द्वार पर एक ऊंचा रैंप बनाकर पूरे दफ्तर में टाइल लगवा दी। जिससे अब शायद नगर परिषद दफ्तर में पानी भरने की समस्या का समाधान हो जाए। वहीं, इलाका निवासियों का आरोप है की नगर परिषद के कर्मचारियों ने अपने दफ्तर को बचाने के लिए जितनी फुर्ती दिखाई अगर यह कर्मचारी आम जनता की समस्या को भी इसी प्रकार से समझें तो यह हालात पैदा ना हों। एक आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद ने इलाके की साफ सफाई का ठेका एक निजी कंपनी को दे रखा है। जिसका खर्चा हर महीने लगभग 11 लाख से अधिक है। साफ सफाई के ठेके पर नगर काउंसिल द्वारा पिछले बजट वर्ष में 13 करोड़ 58 लाख रुपए खर्च किए हैं। फिर भी बारिश के बाद इलाके मे इतनी बदहाली है।
वहीं इस मामले में मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान तरुण शर्मा का कहना है कि नगर काउंसिल आम जनता की परेशानियों को नहीं समझती। इलाके की निकासी पाइप लाइनों की सफाई समय-समय पर की जाए तो इस तरह से मलवा बाजार में नहीं फैलेगा। इस मामले में सेनेटरी इंस्पेक्टर राम गोपाल का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले पर कार्यवाही की जाएगी। इस प्रकार मलबा फैलने से इलाके में बीमारी फैलने का खतरा भी रहता है। जल्द से जल्द इलाके की सभी पाइपलाइन की सफाई करवा दी जाएगी।
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