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पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद सतलुज-यमुना लिंक नहर का मुद्दा गरमाया

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लांडरां/बनूड़। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सतलुज-यमुना लिंक नहर के मामले को सुलझाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच बैठक के बाद क्षेत्र में नहर का मुद्दा गरमाने लगा है। क्षेत्र के लोगों और किसानों ने नहर को राज्य की सीमा तक चलाकर नालों के माध्यम से भूमि की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।
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एसवाईएल नहर पर बने साइफन पर बात करते हुए क्षेत्र के शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य जत्थेदार सुरजीत सिंह गढ़ी, भाकियू चढूनी के प्रदेश सचिव मंजीत सिंह घुमाना, मोहाली जिले के अध्यक्ष नंबरदार सतनाम सिंह सत्ता खलौर, हैप्पी गुरनाखेड़ी, हरबंस सिंह, तजिंदर सिंह, जगजीत सिंह बंटी, इंद्रजीत इस्सापुरिया, बलकार सिंह बैंस, जसवीर जस्सी राजपुरा, हरबंस सिंह, मनप्रीत सिंह, जसविंदर सिंह और नंबरदार कुलदीप सिंह मान ने कहा कि जब सतलुज-यमुना लिंक नहर बनी, तो क्षेत्र के लोगों की लाखों एकड़ जमीन खराब हो गई थी। उस समय क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि इस नहर के चलने से उनकी भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिल जाएगा, लेकिन इस नहर के न चलने के कारण जहां क्षेत्र में भूजल खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, वहीं किसानों की जमीन बंजर होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि नहर के न चलने से किनारे पर पेड़ और अन्य घास उगने से वहां जंगल बन गया है। इसमें कई जंगली जानवर जैसे जंगली सूअर, भैंस और कई अन्य जानवरों का आवास बनने से क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी कठिनाई से उगाई जाने वाली फसलें वे रात के समय नष्ट कर देते हैं, जिससे क्षेत्र के किसान बहुत परेशान होते हैं। क्षेत्र के लोगों और किसानों ने राज्य सरकार से एसवाईएल नहर को सराला राज्य की सीमा तक चलाने और क्षेत्र के किसानों को नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस नहर के चलने से जहां क्षेत्र के लोगों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। वहीं जंगली जानवरों के आवास नष्ट हो जाएंगे और फसलें बर्बाद होने से बच जाएंगी।
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भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के जिलाध्यक्ष किरपाल सिंह स्याऊ, डकोंदा के जिलाध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी कराला, लखविंदर सिंह कराला, गुरविंदर सिंह, हरजीत सिंह गिल, कुलवंत सिंह नडियाली और नंबरदार प्रेम कुमार मानकपुर ने कहा कि राजपुरा, घनौर, डेराबस्सी, खरड़, मोहाली, बस्सी पठाना और फतेहगढ़ साहिब के किसानों को सिंचाई के लिए नहर का पानी नहीं मिलने से किसानों की हालत खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर जमीन में गहरा होने से किसानों के लिए गहरे ट्यूबवेल लगाना बहुत मुश्किल है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है और किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं।
पंजाब का पानी छीनने की कोशिश की तो केंद्र के खिलाफ दोबारा करेंगे संघर्ष
किसानों ने राज्य सरकार से मांग की है कि नहर को पंजाब की सीमा तक चलाया जाए और इन सात विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को पीने और सिंचाई के लिए नहर का पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पंजाब का पानी छीनने की कोशिश की गई, तो दोबारा संघर्ष शुरू कर दिया जाएगा।
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फोटो - लांडरां/बनूड़ नहर के किनारे बातचीत करते हुए क्षेत्र के निवासी और किसान।
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