मोहाली में करीब 13 साल पहले मार्च 2009 में समीर वत्स की फेज-8 में गोली मारकर हत्या की गई थी। मृतक बेटे को इंसाफ दिलाने और आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता कर्नल (सेवानिवृत्त) सुरिंदर कुमार वत्स वर्षों से जंग लड़ रहे हैं। पुलिस से लेकर सीएम तक गुहार लगाने के बाद भी जब कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
पीड़ित पिता का कहना है कि उन्हें पक्का विश्वास है कि आरोपी अब सलाखों के पीछे पहुंचेंगे। पंचकूला सेक्टर-25 निवासी कर्नल (सेवानिवृत्त) सुरिंदर कुमार ने बताया कि उनके दो बेटों में से एक इंग्लैंड में सेटल है जबकि दूसरा बेटा समीर मोहाली में नौकरी करता था। वर्ष 2009 में जब बेटे की हत्या हुई तो उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। केस में मोहाली पुलिस ने कुछ दिन तो अच्छा काम किया लेकिन बाद में पुलिस पर दबाव आ गया क्योंकि बहू के रिश्तेदार अच्छे रसूखदार थे और उन्होंने जांच नहीं होने दी लेकिन उन्होंने भी हार नहीं मानी।
करीब 50 बार एसएसपी से मिले। कई बार डीजीपी से उचित जांच की गुहार लगाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि पंजाब के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखे लेकिन निराशा हाथ लगी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने सारे मामले की पड़ताल के बाद जो फैसला सुनाया है, उससे उन्हें काफी राहत मिली है। वह सीबीआई को काफी अहम जानकारियां मुहैया करवाएंगे जिससे केस हल करने में सफलता मिलेगी। बेटे की मौत के बाद उनकी पत्नी भी अवसाद का शिकार हो गई। कहा कि वह एक फौजी हैं, हार नहीं मानेंगे।
बेटे को फोन कर बुलाया, फिर कर दी हत्या
कर्नल सुरिंदर ने बताया कि उनके बेटे की हत्या करवाई गई। बेटा मोहाली में नौकरी करता था। वहीं पर उसने फ्लैट ले रखा था, जहां पर पत्नी के साथ रहता था। हत्या वाले दिन किसी ने फोन कर समीर को फेज-8 बुलाया। फोन करने वाले ने कहा कि उसे उसकी पत्नी के बारे में कुछ बताना है। जब उसका बेटा कार से वहां पहुंचा तो गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। हत्या की सूचना बहू के परिजनों ने दी थी। निजी अस्पताल में बेटे ने काफी समय तक मौत से जंग लड़ी लेकिन वह हार गया।