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विवादित जमीन की ट्रांसफर रजिस्ट्री करने को लेकर जताया रोष

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कुराली। गांव तीड़ा की विवादित जमीन की ट्रांसफर रजिस्ट्री एक व्यक्ति द्वारा अपने बेटे के नाम पर कराने को लेकर बुधवार को गांव की पंचायत और गण्यमान्यों ने सब-तहसील माजरी के आगे रोष प्रदर्शन करते हुए इस मामले की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जब आरोपी को पंचायत द्वारा डाले केस का पता चला तो उन्होंने मिलीभगत से जमीन का कुछ हिस्सा बेटे के नाम पर करवा दिया ताकि केस लंब खिंचता चला जाए।
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इस मौके रोष जताते हुए गांव तीड़ा की सरपंच सुमन बाला, पूर्व सरपंच जगजीवन लाल, नंबरदार जगतार सिंह और अन्य ने कहा कि 2016 में गांव तीड़ा के खसरा नंबर 34/9/2 (1 कनाल 4 मरले) शामलात रास्ता कटवाने की आड में गांव तीड़ा के एक वासी ने माल विभाग के उच्च अधिकारियों को पैसे देकर अपने नाम करवा ली थी। जब इस संबंधी गांव की पंचायत को पता चला तो पंचायत ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में केस दायर किया और अदालत ने पंचायत को संबंधित अथारिटी के पास रिकॉल करवाने के आदेश दिए। अदालत के आदेशों अनुसार पंचायत ने मामले को दोबारा से उठाया लेकिन जब उक्त केस दोबारा खुल गया तो जमीन अपने नाम करवाने वाले ने इस केस को लटकाने के उद्देश्य से 1 कनाल 4 मरले जमीन की मलकीयत अपने लड़के के नाम तबदील करवा दी।
सरपंच और अन्य ने बताया कि अदालत ने शामलात जमीनों की रजिस्ट्रियां और गिरदावरियों पर पाबंदी लगाई हुई है। फिर भी माजरी की सब-तहसील में अदालती आदेशों को अनदेखा करके तबदीलनामा रजिस्टर्ड कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार, विजिलेंस और जिला प्रशासन से मांग की कि मामले की जांच करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और शामलात जमीन गांव की पंचायत को सौंपी जाए।
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इस बारे में नायबतहसीलदार माजरी जसकरण सिंह बराड़ ने कहा कि दोष झूठे हैं। जिस रकबे की तबदील रजिस्ट्री की गई है, वह मलकीयत है। रकबा पहले शामलात जरूर था लेकिन डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू अफसर की अदालत ने उक्त रक्बा नरिंदर सिंह को उसकी जमीन में से रास्ते की कटौती करके दिया था। इस कारण अब उक्त जमीन शामलात नहीं है।
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