मोहाली। अगर समय के साथ कोई बदला है तो वह है रेडियो। सुनने में यह बात हैरानी वाली लगती है, लेकिन सौ फीसदी सच है। समय के साथ तालमेल करते हुए रेडियो ने अपने स्वरूप से लेकर प्रोग्रामों के स्टाइल तक को बदल लिया है। ऐसा लगता है कि मानो वह अब जिंदगी का हिस्सा बन गया है।
आज हालत यह है कि सुबह की अखबार हो या फिर किस सड़क पर लगा जाम, या फिर नई फिल्म। वह सब रेडियो से पता चलती है। कोरोना काल में तो रेडियो ने जबरदस्त भूमिका निभाई। रेडियो ने न केवल कोरोना से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक मदद भी पहुंचाई। विश्व रेडियो दिवस पर आज कुछ ऐसे रेडियो ऑरजे से मिलाने जा रहे हैं जोकि लोगों को चौबीस घंटे हर छोटी बड़ी चीज से रूबरू करवाते हैं।
डिजिटल समय में रेडियो भी हुआ डिजिटल
कहते हैं कि वक्त के साथ चलना जरूरी है। रेडियो एक ऐसा ही माध्यम है जो समय के साथ चल रहा है। डिजिटल समय में रेडियो भी डिजिटल हुआ है। बीते कुछ सालों में सभी रेडियो जॉकी ने अपने सभी शो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी करना शुरू कर दिए हैं। कह सकते हैं रेडियो समय के साथ पूरा नहीं बदला है। वह अपनी पुरानी रिवायत को साथ लेते हुए नए समय की जरूरतों के साथ चल रहा है। वहीं, डिजिटल की हमें बहुत मदद मिली है। जहां पत्र और फोन के जरिए लोग हमारे साथ संपर्क में रहते थे। आज वे हमें कभी भी मैसेज कर सकते हैं और वीडियो के जरिए हमें असलियत में देख सकते हैं।
-मेघा कुमारी, रेडियो जॉकी, बिग एफएम
कोरोना काल में लोगों ने समझी रेडियो की कीमत
रेडियो जॉकी होने के नाते मेरा काफी समय रेडियो पर ही गुजरता है, लेकिन कोरोनाकाल में मेरे साथ-साथ आम लोगों को भी रेडियो की असली अहमियत पता चली। कोरोनाकाल में रेडियो का अलग से रूप उभरकर आया। लोगों में कोरोना को लेकर जो डर था, उसे कम करने में बहुत अहम रोल अदा किया है। मेरा मानना है कि रेडियो सिर्फ गाने या चुटकुले सुनने का ही माध्यम नहीं है। मेरी कोशिश रहती है कि अपने शो के दौरान मैं हर वर्ग के व्यक्ति को अपनी आवाज से मदद पहुंचा सकूं। रेडियो आज भी लोगों के दिल में वहीं जगह रखता है जो पहले समय में रहता था। बस उसका रूप थोडा एडवांस हुआ है।
-गुर्री, रेडियो जॉकी, बिग एफएम
रेडियो सुनकर भावनाओं में खो जाते हैं लोग
मेरे शो की शुरुआत सुबह से होती है। जहां मैच्योर लोग मौजूद होते हैं। जो अक्सर ऑफिस जाते समय और घर में काम करते समय रेडियो सुनते हैं। प्रोग्राम का लोगों को बेसब्री से इंतजार होता है, जिससे लगता है रेडियो की अहमियत वैसी की वैसी है। इसका रूप नहीं बदला है। अब काफी तरह के सोशल मीडिया के माध्यम आ गए हैं, लेकिन लोग रेडियो के प्रभाव से जुड़े हुए हैं। भले ही लोगों के पास हर तरह का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, लेकिन रेडियो सुनकर लोग भावनाओं में खो जाते हैं। रेडियो को सुनते हुए लोग शब्दों को अपने जीवन में हुई घटनाओं से तुरंत जोड़ लेते हैं।
-अनुभव, रेडियो जॉकी, रेड एफ एम
रेडियो हमेशा जिंदा रहेगा
रेडियो का संबंध बड़े शहरों तक नहीं है। यह देश के हर कोने में पहुंचा हुआ है। आज भी देश का माध्यम वर्गीय परिवार रेडियो को बड़े ही उत्साह से सुनता है। रेडियो को आज के बदलते समय से कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि बड़ी से बड़ी घटना आज भी रेडियो के जरिए पहले लोगों तक पहुंचाई जाती है। अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं सरकार तो आएगी जाएगी। ये देश और लोकतंत्र रहना चाहिए। मैं कहती हूं सोशल मीडिया आएगा जाएगा, लेकिन रेडियो हमेशा जिंदा रहेगा।
-शताब्दी भटनागर, रेडियो जॉकी, रेड एफ एम
नौजवान बुजुर्गों के रेडियो कराने आते हैं ठीक
हमारी दुकान सबसे पुरानी दुकान है। जहां मोहाली के लोग अक्सर रेडियो ठीक करने के लिए आते हैं। इनमें अधिकतर वे लोग होते हैं, जिनके पिता रेडियो के शौकीन हुआ करते थे या जिनके माता-पिता सिर्फ रेडियो सुनना ही पसंद करते हैं। वहीं, काफी नौजवान ऐसे भी हैं जो रेडियो गाड़ी में सुनना पसंद करते हैं। कुछ समय पहले ही हमारे पास एक नौजवान आया था जो 1960 का वॉल वाला रेडियो लेकर आया था जो ऑन करने के पांच मिनट बाद सुनाई देते हैं। वह रेडियो आज के समय में कहीं नहीं मिल सकता। अब पुराने रेडियो की जगह कारवां ने ले ली है जो हर वर्ग की पसंद बना हुआ है।
-रविदंर सिंह, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक दुकान के मालिक