मार्च निकालते गुरजोत सिंह कलेर
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देश के सामाजिक मुद्दे हों या फिर किसानों का दर्द। इन सभी मुद्दों को अपने गीतों, कविताओं और किताबों के जरिए उठाने वाले डीएसपी गुरजोत सिंह कलेर ने अब नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लंदन में आवाज उठाई है। उन्होंने वहां अपने साथियों के साथ शांतमयी प्रदर्शन किया। इस दौरान मेजर जनरल सर हैनरी हैवलॉक और रॉबर्ट क्लाइव की प्रतिमाओं को लंदन की सेंट्रल प्लेस ट्राफलगर स्कवायर से हटाने की मांग की। उन्होंने बताया कि उनका यह प्रदर्शन गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित था।
इस दौरान उनके साथ सिमरजीत सिंह बब्बर, अमनिंदर सिंह कोहली और मोहनी सिंह भी थे। गुरजोत सिंह ने बताया कि वह इन दिनों वह ब्रिस्टल में निजी दौरे पर हैं। यहां नस्लीय भेदभाव के नाम पर हो रही हिंसा देखकर बहुत बुरा लगा। इस दौरान उन्हें लगा कि इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। यही वक्त है कि अपने देश को रिप्रेजेंट किया जा सकता है। उन्होंने साफ किया है कि यह मुहिम निजी फायदे के लिए नहीं बल्कि देश के लिए है। इसके लिए वह अब यूके के भारतीयों तक पहुंच रहे हैं।
मार्च से पढ़ाया शांति का पाठ
गुरजोत सिंह ने बताया कि उन्होंने यूनाइटेड किंगडम की सरकार के साथ एक याचिका भी शुरू की है। इसके लिए लोगों से हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। लंदन में इंडिया हाउस से ट्रॉफलगर स्कवायर तक मार्च निकाला गया। हालांकि कोरोना के चलते उन्हें वहां की पुलिस ने रास्ते में रोक लिया लेकिन फिर कुछ लोगों को ही वहां जाने की अनुमति दी गई। उन्होंने अपने इस मार्च से भी दुनिया को शांति और अहिंसा का पाठ का पढ़ाया है।
यह हैं मुख्य मांगें
गुरजोत सिंह ने बताया कि उनकी मुख्य तीन मांगें हैं। इनमें पहली मांग मेजर जनरल सर हेनरी हैवलॉक की प्रतिमा को हटाना क्योंकि वह हत्यारा था। उसने असंख्य भारतीयों की हत्या की थी। भारतीय के आजादी संघर्ष को 1857 में उसने बेरहमी से दबा दिया था। दूसरी मांग रॉबर्ट क्लाइव की प्रमिता को हटाना है। उसने भारत के धन को लूटा था। वह सिंध की बर्बादी और बंगाल में अकाल के लिए जिम्मेदार था। तीसरी मांग हैवलॉक रोड का नाम बदलकर गुरु नानक देव रोड रखा जाए। क्योंकि भारत के बाहर सिखों का सबसे बड़ा गुरुद्वारा हैवलॉक रोड पर स्थित है।