मोहाली। कोरोना संक्रमण के मामले आने पर और लोगों के टीकाकरण करवाए जाने के कारण रक्तदाताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया है। इस कारण सड़क हादसों और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजोें को, जिन्हेें खून की अधिक जरूरत पड़ रही है, उनके लिए यहां जिला सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ 30 यूनिट खून ही बचा है। ऐसे में जिन गंभीर मरीजों को खून की जरूरत है उन्हें खून की कमी के कारण चंडीगढ़ रैफर करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक जिला सिविल अस्पताल में खून की कमी के कारण लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक किया जा रहा है। सेहत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसी महामारी के दौर में जो लोग रक्तदान कर सकते हैं उन्हें इसके लिए आगे आना चाहिए। सेहत विभाग इसके लिए लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है।
बता दें कि वर्ष-2020 में जबसे कोरोना ने दस्तक दी थी इसके बाद करीब 10 ही रक्तदान शिविर लगे थे। इस साल भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। अगर आगे भी लोग रक्तदान के लिए आगे नहीं आए तो आने वाले समय में खून की कमी के कारण मरीजों का इलाज करने में मुश्किलें आ सकती हैं और इससे हालात गंभीर हो सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक फेज-6 स्थित जिला सिविल अस्पताल में केवल मोहाली शहर के ही नहीं, बल्कि खरड़ सब डिवीजन और कुराली से भी गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां भर्ती मरीजों को खून की जरूरत भी होती है। जिला सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 500 यूनिट खून रखने की है, लेकिन अब यहां खून की मात्र तीस यूनिट ही रह गई हैं। ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉक्टर नवनीत देओल ने बताया कि उन्होंने पिछले साल जुलाई, 2020 में ज्वाइन किया था। उस समय कोरोना के कारण लॉकडाउन जैसे हालात बने हुए थे, इस कारण बहुत कम लोग यहां लगाए गए रक्तदान शिविरों में आकर रक्तदान करते थे। जितने भी शिविर लगाए गए वे किसी न किसी संस्था की मदद से ही लगाए गए थे। उन्होंने जनवरी, 2020 से लेकर दिसंबर, 2020 तक शहर में 15 शिविर लगाए थे। इनसे करीब 1600 यूनिट खून हमारे पास पहुंचा था। इसमें से 1570 यूनिट मरीजों को दी जा चुकी हैं जबकि, 30 यूनिट खराब हो चुकी हैं।
वहीं, जनवरी-2021 से लेकर मई तक 8 रक्तदान शिविर लगाए गए हैं। इनमें से हमारे पास 400 यूनिट ब्लड पहुंचा है। जिसमें से 20 यूनिट खराब हुई हैं, यह खून बीमार लोगों का था। वहीं 26 मई तक हमारे पास 30 यूनिट खून ही बचा है। क्योंकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और जच्चा-बच्चा केंद्र में होने वाली गर्भवती की डिलीवरी के समय खून की लगातार मांग रही है। ऐसे में चंडीगढ़ के अस्पतालों ने भी मरीजों को लेने से मना कर दिया था। हम मरीजों के परिजनों को भी जागरूक करते हैं, लेकिन इसके
बाद भी लोग दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
जच्चा-बच्चा केंद्र में होती है ज्यादा खून की जरूरत
ब्लड बैंक में खून का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादातर जच्चा बच्चा केंद्र से ही खून के लिए फोन आता है, क्योंकि वहां रोजाना गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती रहती है, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण हमें खून की कमी पड़ रही है। धार्मिक स्थानों पर लगाने वाले रक्तदान शिविरों में एकत्रित ज्यादातर खून चंडीगढ़ के बड़े अस्पतालों को ही जाता
है और कुछ मोहाली के निजी अस्पताल में चला जाता है। सेहत विभाग के मुताबिक खून की कमी पूरी करने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए।