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Mohali News: अब रंग-बिरंगा गेहूं करेगा मधुमेह प्रबंधन में मदद

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गेहूुं। फाइल 
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मोहाली। नेशनल एग्री-फूड एंड बायोमैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट (नाबी मोहाली) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ब्लैक गेहूं न सिर्फ पोषण से भरपूर है बल्कि टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में भी कारगर सिद्ध हो रहा है। डॉ. मोनिका गर्ग और उनकी टीम द्वारा तैयार इस विशेष गेहूं में एंथोसायनिन, प्रोटीन, आयरन, जिंक और फाइबर की मात्रा अधिक होती है।
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नाबी में किए गए शोध और हाल ही में रायल सोसायटी आफ केमिस्ट्री के फूड एंड फंक्शन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन एंथोसियानिन रिच ब्लैक व्हीट एस फंक्शनल फूड फार मैनेजिंग टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस-ए स्टडी आन हाई फैट डाइट स्ट्रेपटोजोटोसिन इंड्यूस डायबिटिल रैट के अनुसार ब्लैक गेहूं का सेवन टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित रोगियों के लिए लाभकारी हो सकता है। यह अध्ययन बताता है कि उच्च वसा वाले आहार और स्ट्रेप्टोज़ोटोसिन (से प्रेरित डायबिटिक चूहों में ब्लैक गेहूं ने ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को नियंत्रित करने, इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने और लिपिड प्रोफाइल को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

छह साल के शोध के बाद मिली सफलता

वर्ष 2011 में नाबी में शोध कार्य के दौरान, डॉ. मोनिका गर्ग ने बायोफोर्टिफिकेशन तकनीक पर कार्य करना शुरू किया। इसके तहत जापान और अमेरिका से प्राप्त जर्मप्लाज्म को भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया गया। इसके बाद प्लांट ब्रीडिंग तकनीकों का उपयोग कर बैंगनी, नीले और काले रंग की गेहूं की किस्में विकसित की गईं। इनमें सबसे अधिक एंथोसायनिन ब्लैक गेहूं में पाया गया। बीज के बैंगनी और काले संस्करण को 2017 में व्यावसायिक रूप से जारी किया गया।
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ब्लैक गेहूं का प्रभाव : अनुसंधान और निष्कर्ष

ब्लैक गेहूं की जैव सक्रियता को जानने के लिए इसे हाई फैट डाइट पर रखे गए चूहों पर 12 सप्ताह तक परखा गया। इस अध्ययन के परिणाम उत्साहजनक रहे, जिसमें यह पाया गया कि ब्लैक गेहूं चूहों में रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित करने, इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने और लिपिड प्रोफाइल में सुधार करने में सहायक था। शोध को आगे बढ़ाते हुए टाइप 2 डायबिटीज मॉडल पर अध्ययन किया गया, जिसमें ब्लैक गेहूं के सकारात्मक प्रभाव को और विस्तार से जांचा गया। हाल ही में प्रकाशित फूड एंड फंक्शन जर्नल में रिपोर्ट किया गया यह अध्ययन विशेष रूप से टाइप 2 डायबिटीज मॉडल पर केंद्रित था और इससे जुड़े चयापचय सुधारों को उजागर करता है।

उद्योगों में बढ़ रही मांग

ब्लैक गेहूं की उच्च पोषण गुणवत्ता और औषधीय गुणों को देखते हुए देश की 28 से अधिक कंपनियों ने नाबी के साथ एमओयू साइन किए हैं। अनुबंध-खेती के माध्यम से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसकी व्यावसायिक खेती की जा रही है। कई कंपनियां इसके आटे और अन्य उत्पादों का निर्माण भी कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को एक स्वस्थ विकल्प मिल सके।


एंथोसायनिन का महत्व

एंथोसायनिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में मुक्त कणों को निष्क्रिय कर सेल डैमेज को रोकता है। यह मोटापा, हृदय रोग और टाइप 2 डायबिटीज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक है। नियमित रूप से एंथोसायनिन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है, और मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है।


ब्लैक गेहूं से बने उत्पादों की लोकप्रियता

वर्तमान में ब्लैक गेहूं से बनी रोटी, आटा, दलिया, और बिस्कुट जैसे उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, ब्रेड, दलिया और चपाती के लिए भी अलग-अलग गेहूं की किस्में विकसित की जा रही हैं, जो उपभोक्ताओं को उनके खानपान के अनुसार स्वस्थ विकल्प प्रदान करती हैं। इन उत्पादों को डायबिटीज रोगियों के लिए एक हेल्दी विकल्प माना जा रहा है। इस गेहूं का उपयोग हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्युटिकल्स के रूप में भी किया जा सकता है।
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