मोहाली। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में क्वालिटी और मानवीय स्पर्श की कमी की धारणा को डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) फेज-6 मोहाली ने तोड़ दिया है। इंस्टीट्यूट ने एक सफल रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के माध्यम से साबित किया है कि म्यूजिक थेरेपी के साधारण उपयोग से प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) से गुजर रही महिलाओं का दर्द और चिंता प्रभावी ढंग से कम हो जाता है। मंगलवार को आयोजित डिसेमिनेशन मीटिंग में इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. भवनीत भारती ने इस स्टडी के परिणामों को साझा किया, जिसे ‘मॉम: मेलोडिज ऑफ मदरहुड’ नाम दिया गया है। समारोह में मुख्य अतिथि रिटायर्ट आईएएस विन्नी महाजन थे। इस दौरान पीजीआई और सेक्टर-32 के अतिथि भी उपस्थित थे। इंस्टीट्यूट ने उन पांच माताओं को सम्मानित किया, जिन्होंने इस ट्रायल में भाग लेकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में मदद की। यह पहल दर्शाती है कि प्रभावी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए महंगी मशीनरी ही सब कुछ नहीं है, बल्कि कम्युनिटी मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स और साइकेट्री जैसे विभागों के सहयोग से मानवीय और सस्ती थेरेपी भी बड़े बदलाव ला सकती हैं।
निजी अस्पतालों की सुविधा, सरकारी में मुफ्त
सितंबर 2023 में इस ट्रायल की शुरुआत इस विचार से हुई कि निजी अस्पताल ही प्रेगनेंसी के दौरान पसंदीदा संगीत और अरोमा जैसे पैकेज देते हैं, जबकि सरकारी अस्पताल क्वालिटी केयर में पीछे रह जाते हैं। यह ट्रायल सरकारी अस्पताल में क्वालिटी पर फोकस है। निजी अस्पताल महंगे पैकेज बेचते हैं, लेकिन एक पीएचडी म्यूजिक थेरेपिस्ट की मदद से बिना किसी बड़े खर्च के लेबर पेन से गुजर रही महिलाओं को वही आराम दे सकते हैं। संगीत से मरीजों को आराम मिलता है और उनका दर्द और चिंता दूर हुई। ट्रायल के दौरान, लेबर पेन वाली महिलाओं को उनकी पसंद का संगीत सुनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी चिंता के स्तर में उल्लेखनीय कमी आई। कई वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया कि संगीत मन को रिलैक्स करता है। पीजीआई और सेक्टर-32 जीएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों में भी पृष्ठभूमि में हल्का संगीत चलने का प्रचलन है, जो इसी वैज्ञानिक प्रमाण पर आधारित है।
पूरी संस्था को तनाव मुक्त करने का नुस्खा
स्टडी की सफलता सिर्फ गर्भवती माताओं तक सीमित नहीं रही। इंस्टीट्यूट ने इस थेरेपी का दायरा बढ़ाकर इसे दो अन्य महत्वपूर्ण समूहों पर भी आजमाया है।
1. मिल्क बैंक की महिलाएं : स्टडी ने दूध देने वाली महिलाओं पर भी संगीत के सकारात्मक असर का अध्ययन किया।
2. नर्सिंग स्टाफ : अध्ययन में पाया गया कि नर्सिंग स्टाफ पर भी हल्का बैकग्राउंड म्यूजिक तनाव कम करने और उनके काम की गुणवत्ता को सुधारने में सहायक है।