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ड्रग तस्करी मामला: शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को मोहाली अदालत से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Fri, 24 Dec 2021 07:17 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)

सार

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को मोहाली जिला अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने देर शाम उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अब वह हाईकोर्ट की शरण लेंगे।
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बिक्रम सिंह मजीठिया। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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नशा तस्करी से संबंधित केस का सामना कर रहे पंजाब के पूर्व मंत्री एवं अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को जिला अदालत से झटका लगा। अदालत ने शुक्रवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, बिक्रम मजीठिया के वकीलों का कहना है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है। उन्हें अदालत पर पूरा विश्वास है और वह मामले में हाईकोर्ट की शरण लेंगे।

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बिक्रम सिंह मजीठिया ने गुरुवार को अपने वकीलों के माध्यम से सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत याचिका अदालत में दायर की थी। सरकारी वकील और मजीठिया के वकीलों में जमकर बहस हुई थी। पुलिस ने अपना रिकॉर्ड पेश किया तो मजीठिया के वकीलों ने कई फैसलों का जिक्र अदालत में किया। साथ ही कहा कि केस गलत दर्ज किया गया है। 

दोपहर में सुनवाई पूरी हो गई थी। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। शाम करीब 6 बजे याचिका खारिज कर कर दी गई। इससे पहले बिक्रम सिंह मजीठिया के वकीलों ने अदालत को बताया कि वह पंजाब के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। वहीं, राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में राजस्व, नवीकरणीय ऊर्जा, एनआरआई मामले आदि मामलों के विभाग देख चुके हैं। वह शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख नेताओं में हैं।
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वकीलों ने कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया पर झूठा केस दर्ज करने के लिए तीन महीने में तीन डीजीपी तक बदल दिए गए हैं। यहां तक कि जब पूर्व डीजीपी इकबाल प्रीत सिंह सहोता ने केस दर्ज करने से मना किया तो उन्हें रातोंरात बदल दिया गया। इसके बाद सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को कार्यकारी डीजीपी लगाया गया। हालांकि नियमित डीजीपी की अभी नियुक्ति नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि मौजूदा डीजीपी की शिरोमणि अकाली दल से पुरानी दुश्मनी रही है। बादल परिवार पर उन्होंने 2003 में केस दर्ज किया था। जिसमें परिवार 2010 में बरी हुआ था। दूसरा मजीठिया के वकीलों ने कहा कि जब यह ड्रग केस चल रहा था। उस समय में बिक्रम मजीठिया को किसी भी कोर्ट ने समन भेजकर तलब नहीं किया था। अदालत में कहा गया है कि एसटीएफ प्रमुख ने अपनी रिपोर्ट में तीन व्यक्तियों के बयानों को भी पुन: प्रस्तुत किया।

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