डॉ. शगुन और डॉ. करण।
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मोहाली के शगुन वालिया और करण अग्रवाल एमबीबीएस के पहले साल में ही गहरे दोस्त बने। दोस्ती बढ़ी तो दोनों की आंखें चार हुई। छह साल तक दोनों इकट्ठे पढ़े और लाइब्रेरी में एक साथ बैठकर मैगी खाते थे। इतनी मुश्किल पढ़ाई में भी एक दूसरे के लिए जरूर समय निकालते थे। छह साल बाद 2013 में दोनों ही एक दूसरे से अलग हुए।
डॉक्टर करण बताते हैं कि दोनों के माता-पिता राजी थे। लेकिन पढ़ाई के दूसरे साल में किसी ने गलत बातें फैलाई। मैंने शगुन के प्रोफेसर पिता को सीधा फोन करके बताया कि मैं शगुन को पसंद करता हूं। 2014 में शगुन दिल्ली आई तो प्लान बनाया कि वह उसे ताजमहल पर प्रपोज करेंगे, एक अंगूठी तक खरीदी। ताजमहल में अंदर जाने लगे तो स्कैनर ने जेब में रखी अंगूठी पकड़ ली। लेकिन मैं किसी तरह सुरक्षाकर्मियों की मदद से अंगूठी अंदर लेकर जा सका। जबकि शगुन को कुछ मालूम नहीं था, जैसे ही अंदर चल रहा शो खत्म हुआ तो मैंने घुटनों पर बैठकर शगुन के सामने झुककर अंगूठी देकर प्रपोज कर दिया। शगुन इतनी खुश हुई थी कि बस में वापस आ रहे थे तो शगुन खुशी में चिल्लाकर कई बार कहती रही कि हम दोनों शादी करने वाले हैं।
करण दिल्ली के एम्स में तो शगुन मणिपुर में कार्यरत
डॉ. करण दिल्ली के एम्स में तो डॉ.शगुन मणिपुर में तैनात हैं। शगुन ने बताया कि 2016 में मणिपुर और दिल्ली रहते हुए शादी की बात नहीं की। लेकिन परिवार कह रहा था कि शादी करो तो शादी की बात सोची। नवंबर 2016 में ही हमारी शादी हुई। करण और शगुन ने आजकल की जोड़ियों को प्रेम के अनुभव से संदेश दिया। रिश्तों में कुछ अप-डाउन चलते हैं। लेकिन हम एक दूसरे के लिए ईमानदार थे। आज 14 साल हो गए हैं हम खुश हैं। करण और शगुन ने कहा कि अगर प्रेमी एक-दूसरे के लिए ईमानदार हैं तो रिश्ता लंबा चलेगा और प्यार, भरोसा, और सम्मान है तो प्यार हमेशा बढ़ेगा।