यहां बता दें कि पाकिस्तानी वायुसेना ने इसी ऊंचाई पर लड़ने से साफ इनकार कर दिया था। इस ऐतिहासिक जंग के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा रहे एक ‘मिग-21’ लड़ाकू विमान को मोहाली लाया गया था। जो इन दिनों राज्य के इकलौते आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट के परिसर में शोभायमान है। आईएमए यानी इंडियन मिलिटरी अकादमी के डायरेक्टर रहे मेजर जनरल बीएस ग्रेवाल को रिटायरमेंट के बाद एएफपीआई के डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इस पर मेजर जनरल ग्रेवाल ने तत्कालीन एयर चीफ मार्शल से कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले एक मिग विमान को इंस्टीट्यूट के परिसर में स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा। इससे भारतीय सेनाओं में अधिकारी के तौर पर शामिल होने का सपना संजो कर आने वाले पंजाब के युवाओं को सेना के गौरवशाली स्वर्णिम इतिहास से प्रोत्साहन मिल सके। एयर चीफ मार्शल ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए बठिंडा में तैनात ‘मिग-21’ को मोहाली भेजने के आदेश दिए। इसके बाद मई, 2012 में यह भारतीय वायुसेना का यह लड़ाकू विमान मोहाली लाया गया और इसे एएफपीआई परिसर में स्थापित किया गया।
मोहाली लाए गए कारगिल वॉर हीरो से जुड़ी जानकारी
- कारगिल वॉर के हीरो इस ‘मिग-21’ का भारतीय नाम त्रिशूल है
- यह विमान 2125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है
- कारगिल युद्ध से पहले यह विमान 1971 और 1965 के युद्ध में दुश्मन से लोहा ले चुका है
- इस लड़ाकू विमान में 23 एमएम गन लगी हैं
- यह विमान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागने में सक्षम है
- पांच-पांच सौ किलो के दो भारी भरकम बम ले जाने और दागने की क्षमता रखता है
- विमान का वजन 8000 किलो है