नयागांव की रहने वाली सावित्री देवी ने समाजसेवा कर अपना नाम कमाया है। आज उन्हें लोग सावित्री बहन जी के नाम से जानते हैं। उन्होंने अपनी 31 साल की शिक्षिका की नौकरी में पंजाब में कई नए स्कूल भी बनवाए हैं। नौकरी के दौरान हमेशा उन्होंने सफेद खादी से बने वस्त्र ही पहने हैं।
मूल रूप से पाकिस्तान में जन्मी सावित्री देवी के सिर से मात्र ढाई महीने की उम्र में पिता का साया छीन गया था। करीब 14 साल की उम्र में वह पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद से हिंदुस्तान आई थीं। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने जम्मू से की थी। इसके पश्चात 1960 में सावित्री देवी पंजाब के गुरदासपुर में शिक्षिका के तौर पर काम करने लगीं। पढ़ाई के दौरान ही देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन ने उनके दिमाग पर काफी असर छोड़ा। वह भी महात्मा गांधी की तरह ही देश की सेवा करना चाहती थीं।
सावित्री देवी ने बताया कि उनकी पहली नौकरी गुरदासपुर के मांग्याल गांव से शुरू हुई थी। जहां पर पेड़ों के नीचे बच्चों की पढ़ाई होती थी, लेकिन उन्होंने ठाना कि वह इस गांव मे एक अच्छा स्कूल बनाकर रहेंगी। इसके लिए उन्होंने गांव के सरपंच से बात कर स्कूल के लिए 2 एकड़ जमीन दिलाई और विभाग से कहकर स्कूल का निर्माण करवाया। इसके बाद उन्होंने ऐसे कई स्कूलों का निर्माण करवाया।
आज भी कई सामाजिक कार्यों से जुड़ीं
शादीशुदा जीवन होने के बाद भी गांधी जी से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने हमेशा सफेद रंग की खादी के वस्त्र ही इस्तेमाल किए। इस कारण इलाके के लोग उन्हें सावित्री देवी से सावित्री बहन जी कहकर पुकारने लगे। आज भी सावित्री बहन जी इलाके में कई प्रकार के सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहती हैं। इलाके के सफाई अभियान से लेकर बच्चों को स्कूल की वर्दी वितरित करने जैसे कई कार्य करती हैं।
किताब भी लिख चुकी हैं सावित्री बहन जी
सावित्री बहन जी समाज सेवा के अलावा कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं। 2018 में वह अपनी 103 कविताओं के साथ एक किताब भी निकाल चुकी हैं, जिसका नाम मेरी पूंजी है।