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पहले कोरोना, फिर चुनाव और अब फंड की कमी से अटका आयुष अस्पताल का काम

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जीरकपुर। पंजाब का पहला आयुष अस्पताल जीरकपुर के गांव दयालपुरा में बनाया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य 2019 में शुरू किया गया था और सरकार की ओर से इस अस्पताल को अप्रैल 2021 में पूरा करने का दावा भी किया गया था। लेकिन अस्पताल अब तक पूरा नहीं हुआ है, क्योंकि अभी विभाग के पास फंड्स की कमी चल रही है। पहले कोरोना के कारण काम की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी और उसके बाद पंजाब में चुनाव आ गए तो छह महीने तक कोई फंड रिलीज नहीं हुआ और अब विभाग के पास फंड की कमी है। इसलिए अस्पताल का काम धीमी गति से चल रहा है। हालांकि विभाग का कहना है कि अस्पताल का काम 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जबकि अभी अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टॉफ भी नहीं है, तो फिर काम कैसे शुरू होगा।
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वहीं, आयुष विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 21 जून के बाद योग दिवस के बाद इस तरफ ध्यान दिया जाएगा और जल्द काम पूरा कर दिया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गति से अस्पताल का काम चल रहा है, उस गति से तो अभी एक साल का समय ओर लग सकता है।
आठ करोड़ की लागत से बनने वाले इस अस्पताल की क्षमता 50 बेड की है और अस्पताल बनाने के लिए ढाई एकड़ जमीन लक्ष्मण सिंह सोढ़ी परिवार की ओर से दान में दी गई थी। इस अस्पताल से होने वाले फायदे की बात की जाए तो पूरी ट्राइसिटी के साथ-साथ पंजाब के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। क्योंकि पंजाब और नार्थ इंडिया के लोग साउथ में जाकर आयुष का लाभ उठाते हैं। अगर यहां आयुष अस्पताल बन जाता है तो लोगों को पैसे के साथ-साथ समय की बचत भी होगी।
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क्या है पंचकर्म चिकित्सा
पंचकर्म आयुर्वेद चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसमें शरीर का शोधन कर रोग मुक्त किया जाता है। कुछ रोग दवाई लेने के बाद ठीक तो हो जाते है लेकिन कुछ समय बाद फिर से आ जाते हैं। इस प्रकार के रोग उत्पन्न करने वाले दोषों को शरीर से बाहर निकालकर अर्थात शरीर का शोधन करके ही रोग को दूर किया जा सकता है। इसी प्रक्रिया का नाम पंचकर्म है।
पांच विशेषज्ञ होंगे तैनात
एएमओ जपनीत शर्मा ने बताया कि आयुष अस्पताल में पांच स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम की तैनाती की जाएगी। वहीं, डॉक्टरों की मदद के लिए जरूरत के हिसाब से स्वास्थ्य कर्मियों को रखा जाएगा। इसके लिए पंचकर्म के लिए एक अलग से स्पेशल थिएटर तैयार किया जा रहा है। नार्थ इंडिया के लोग पंचकर्म चिकित्सा के लिए साऊथ में जाकर लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन जीरकपुर के दयालपुरा में आयुष अस्पताल खुलने के बाद लोगों को कम खर्च में इस सुविधा का लाभ मिलेगा।
कोट्स
आयुष अस्पताल का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है, केवल ग्लास वर्क बाकी है। सीवरेज लाइन के डिस्पोजल के लिए काम चल रहा है, धीमे इसलिए है कि हमारी डिस्पेंसरी के सीवरेज को नुकसान न हो। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ कि पूर्ति के लिए भी हमने लिखकर सरकार को भेज दिया। साथ ही हमारा 21 जून तक योग सेमिनार चल रहा था। अब काम में पूरी तेजी से शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. शशि भूषण, डायरेक्टर आयुष विभाग पंजाब।
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लोगों ने की आयुष अस्पताल की सराहना
आयुष पुराना और बहुत अच्छा इलाज है, इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता। योग और आयुष मनुष्य के लिए भगवान की ओर से दिया वरदान है। हमारे यहां आयुष अस्पताल बन रहा है यह बड़ी खुशी की बात है। लेकिन इसे जल्द पूरा कर देना चाहिए। -रवि कुमार, निवासी गाजीपुर।
कोट्स
आयुष प्रक्रिया के लिए लोग साउथ में जाते हैं और इसका फायदा लेते हैं। पूरे पंजाब में कोई भी आयुष अस्पताल नहीं है। अगर यह बन रहा है तो लोगों को फायदा हो जाएगा, लोकल मतलब एक तरह से घर में ही फायदा मिल जाएगा। -हितेश मुल्तानी, निवासी जीरकपुर।
कोट्स
पहले हमारे पूर्वज इसी प्रणाली का प्रयोग करते थे, लेकिन हम इस प्रकिया को भूल गए हैं। आयुष अस्पताल का काम बड़ी धीमी गति से चल रहा है। हमारी सरकार से अपील है कि अस्पताल को जल्द पूरा किया जाए ताकि लोग इसका फायदा ले सकें। -सुरिंदर आहूजा, निवासी ढकोली।
कोट्स
पंचकर्मा प्रणाली से इलाज किया जाए तो बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। इसलिए यह बहुत ही फायदेमंद प्रक्रिया है। हमारी सरकार से अपील है कि इस अस्पताल को जल्द पूरा किया जाए ताकि लोग अपना इलाज करवा सकें। क्योंकि अभी लोगों को आयुष के लिए साउथ जाना पड़ता है। -करण बेदी, निवासी वीआईपी रोड।
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