देश की सरहदों की रक्षा करते हुए बेटे ने अपनी जान न्योछावर कर दी थी। एक आर्मी अफसर होने के नाते मेरे लिए यह एक गर्व की बात है, लेकिन पिता होने के नाते एक जवान बेटे को खोने का दुख कम नहीं था। ऐसे में मेरी सोच थी कि अपने शहीद बेटे को हमेशा लोगों के दिमाग में जिंदा रखा जाए। साथ ही अपने इलाके के युवाओं को उससे नई प्रेरणा मिल पाए।
13 अप्रैल 1999 में कश्मीर में एक आतंकवादी ऑपरेशन के दौरान वह शहीद हुए थे। भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया था। पंजाब सरकार ने मुंडी खरड़ निवासी मेजर शहीद के नाम का वहां पर एक गेट भी बनाया हुआ है। जो कि खरड़-चंडीगढ़ हाईवे पर खरड़ में है जो युवाओं के अंदर देश प्रेम की एक अलख जगाता है। हालांकि सरकारी कॉलेज का नाम शहीद बेटे के नाम पर रखवाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा।
हरपाल सिंह ने बताया कि मेरे बेटे की तरह अब मेरा पोता भी सेना में जाकर देश सेवा का सपना देख रहा है। पोता नवतेश्वर सिंह हूबहू अपने पिता की तरह ही दिखता है। जैसे उसने अपनी आर्मी में जाने को तैयारी की थी वैसे ही नवतेश्वर सिंह ने भी की। नवतेश्वर को इस समय एयर ऑफिसर के तौर पर भी एज पायलट चुना गया है। वहीं नौ सेना में भी पेपर दे चुका है। 23 जुलाई को आर्मी के लिए इंटरव्यू है। जहां मैं अपने बेटे को देखने के लिए तरसता हूं, वहीं पोते को देखकर ऐसा लगाता है कि जैसे हमारा हरमिंदर पाल यहीं है। इस तरह वह हमारे आसपास ही रहता है, शक्ल-सूरत से देखें तो इसके हावभाव भी बिल्कुल अपने पिता के जैसे ही हैं। वह हमेशा याद आता है। घर का बड़ा बेटा होने के नाते मां की आंखें आज भी उसे पहले ढूंढती रहती हैं।