शहीद भगत सिंह और थिएटर कलाकार गुरशरण सिंह के जन्मदिन पर चर्चा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) पंजाब ने शहीद भगत सिंह और थिएटर कलाकार गुरशरण सिंह के जन्मदिन को समर्पित पंजाब के जिलों में कार्यक्रमों की नौ दिवसीय शृंखला का आयोजन किया। इसके तहत एक चर्चा जिले के फेज-10 स्थित संतोख सिंह धीर लाइब्रेरी में हुई। चर्चा भगत सिंह और गुरशरण सिंह के विचारों और सामाजिक चिंतन पर केंद्रित थी। इसका नेतृत्व डॉ. अरित (गुरशरण भाजी की बेटी और पंजाब स्वास्थ्य विभाग की पूर्व निदेशक), कवि गुरनाम कंवर और नाटककार संजीवन सिंह के साथ-साथ 48 इप्टा कार्यकर्ताओं, लेखकों, बुद्धिजीवियों, विचारकों और रंगकर्मियों ने किया।
चर्चा के दौरान, थिएटर कलाकार बलकार सिद्धू और रवींद्र सिंह रब्ब ने अतिथि के रूप में कहा कि भगत सिंह और गुरशरण सिंह के बीच आम रिश्ता था कि दोनों कलाकार थे। लाहौर में अपने छात्र जीवन के दौरान भगत सिंह ने कुछ नाटकों में काम किया था। इप्टा के गायकों मीत अंग्रेज, दविंदर कौर ढिल्लों और चमन देव शर्मा ने जन और सामाजिक मुद्दों को संबोधित करते हुए गीत प्रस्तुत किए।
डॉ. अरित ने आज के माहौल में भगत सिंह की विचारों और सामाजिक संबंधों की चर्चा पर कहा कि मेरे पिता गुरशरण सिंह ने जीवन में भगत सिंह के सिद्धांतों और विचारों का पालन किया। कवि गुरनाम कंवर ने कहा कि गुरशरण भाजी न केवल अपने मित्रों, लेखकों और कलाकारों के लिए बल्कि समाज के वर्गों के लिए भी एक शख्सियत थे।
संजीवन सिंह ने कहा कि जीवन की चुनौतियों के बावजूद, भगत सिंह और गुरशरण सिंह दोनों लोगों के साथ खड़े रहे, उनके लिए लड़े। उन्होंने न केवल दलितों के दर्द को समझा, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाया।
इन चर्चाओं के अलावा, सुरिंदर गिल, सरदार सिंह चीमा, अभिनेत्री अमन भोगल, दिलबर सिंह, रंगमंच कलाकार गुरप्रीत सिंह सिंधरा, लेखक हरनाम सिंह दल्ला, पत्रकार गुरप्रीत खोखर और सुरिंदर सिंह रसूलपुरी जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने विचार साझा किए। इप्टा की मोहाली इकाई के महासचिव जसबीर गिल ने कहा कि इप्टा अपने मूल सिद्धांत 'कला कला के लिए नहीं, बल्कि लोगों के लिए है' को कायम रखेगी। अन्य उपस्थित लोगों में उषा कंवर, अमरजीत कौर ढोलेवाल, हरबंस सिंह ढोलेवाल, मोहन सिंह, गुरमन गिल, चिराग गिल और जशिंदर जोश शामिल थे। कार्यक्रम का शानदार संचालन लेखक गुरदर्शन सिंह मावी ने किया।